आरबीआई ने गुरुवार को अपर कैटगरी में शामिल 15 एनबीएफसी की लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस भी शामिल है। आरबीआई के एनबीएफसी टैग से बचने के लिए कंपनी दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है। इस बारे में टाटा संस ने टिप्पणी करने से इन्कार किया। साथ ही टाटा ट्स्ट्स के प्रमुख और टाटा संस के चेयरमैन एमिरेटस रतन टाटा ने भी ईमेल का जवाब नहीं दिया। आरबीआई के मुताबिक अपर लेयर लिस्ट में शामिल एनबीएफसी को सख्त नियमों का पालन करना होगा। इनमें नोटिफाई होने की तीन साल के भीतर लिस्टिंग भी शामिल है। आरबीआई ने पिछले साल सितंबर में पहली बार यह लिस्ट जारी की थी। उसके बाद टाटा संस ने आरबीआई से छूट पाने की संभावनाओं को टटोला था। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन हैं।
क्या हैं विकल्प
एक एनालिस्ट ने कहा कि अगर टाटा संस के शेयरों को आईपीओ के जरिए लिक्विड करेंसी में बदला जाएगा लेकिन वैल्यूएशन के फ्रंट पर पेच फंसेगा। इसकी वजह यह है कि अमूमन इन्वेस्टर्स होल्डिंग कंपनीज में डिस्काउंट अप्लाई करते हैं। हालांकि टाटा संस के पास आरबीआई के नोटिफिकेशन की शर्तों को पूरा करने के लिए टाइम है लेकिन सूत्रों का कहना है कि आरबीआई के नियमों से बचने के लिए कंपनी दूसरे विकल्पों को टटोल सकती है। इसमें कंपनी का पुनर्गठन भी शामिल है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक अपर लेयर एनबीएफसी को नोटिफिकेशन की तारीख के तीन महीने के भीतर अपने रेगुलेशंस के बारे में बोर्ड से अप्रूव एक रोड मैप तैयार करना होगा। यह साफ नहीं है कि टाटा संस के बोर्ड ने एक तरह को कोई प्लान बनाया है या नहीं।टाटा संस के अलावा उसकी इनडायरेक्ट सब्सिडियरी टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज भी आरबीआई की लिस्ट में शामिल है। टाटा संस इस कंपनी को टाटा कैपिटल में मर्ज कर रही है। टाटा संस ने फाइनेंशियल ईयर 2023 की रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को आसान बनाने से एक बड़ी कंपनी बनेगी जिसके पास स्ट्रॉन्ग कैपिटल और एसेट बेस होगा। इससे आरबीआई के नियमों के मुताबिक लिस्टिंग के लिए तैयार स्ट्रक्चर बनाने में मदद मिलेगी।











