पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अफगान तालिबान के लिए कहा है कि सभी को स्थापित मानदंडों और कानूनी ढांचे का पालन करना चाहिए। मंत्रालय ने दोनों देशों के संबंधों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप, सीमा पार लोगों और सामानों की पूरी तरह से विनियमित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात भी कही है। एक दिन पहले अफगानिस्तान से सोवियत वापसी की 35वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कार्यक्रम के दौरान तालिबान सरकार में मंत्री स्टैनिकजई ने कहा था कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा तय करने वाली डूरंड रेखा को वह नहीं मानते हैं।
तालिबान करता रहा है डूरंड रेखा को मानने से इनकार
अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान डूरंड लाइन को आधिकारिक सीमा रेखा मानने से लगातार इनकार करता रहा है। अफगानिस्तान की सत्ता में दोबारा वापसी के बाद भी तालिबान ने कहा था कि ये पाकिस्तान की बनाई बाड़ है, जिसने लोगों को अलग कर दिया है। इसका कोई मतलब नहीं है। अब एक बार फिर तालिबान के मंत्री ने अफगानिस्तान के क्षेत्र को ज्यादा बताते हुए कहा कि अफगानिस्तान की यात्रा के लिए अफगान लोगों को ही वीजा और पासपोर्ट की जरूरत पड़े तो ये स्वीकार्य नहीं हो सकता है।डूरंड रेखा रूसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच 19वीं शताब्दी में तय की गई थी। नवंबर, 1893 को ब्रिटिश सिविल सर्वेंट सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और उस समय के अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान के बीच डूरंड रेखा पर समझौता हुआ था। तत्कालीन ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच 2,670 किलोमीटर की लाइन को मान्यता दी गई थी।











