वायनेट न्यूज की रिपोर्ट कहती है कि ईरान-सऊदी के बीच रिश्ते को बेहतर करने में चीन ने अहम रोल निभाया है, तो इजरायल की आक्रामकता भी इसकी वजह बनी है। ये संबंध सात साल की कड़वाहट से टूट गए थे, अब सावधानीपूर्वक फिर से बनाए जा रहे हैं। सऊदी की राजधानी रियाद में हाल ही में हुए अरब-इस्लामिक समिट में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की जगह आए उनके डिप्टी ने जमकर इजरायल पर हमला बोला। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी समिट को आड़े हाथों लिया।
ईरान के नजदीक क्यों आ रहे क्राउन प्रिंस?
प्रोफेसर फरीद का कहना है कि सम्मेलन में सऊदी की आवाज उसकी कूटनीति में एक साहसिक मोड़ को दिखाता है। यह मोड़ तेहरान और रियाद में दूतावासों के दरवाजे फिर से खोलने के साथ शुरू हुआ और लगातार जारी है। यह खतरों से भरा है लेकिन दोनों पक्ष सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं। खास बात ये है कि दोनों पक्षों के सलाहकार एक-दूसरे की कमजोरियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के डॉक्टर योएल गुजांस्की का मानना है कि मोहम्मद बिन सलमान आज के समय में एक बदले हुए शासक लगते हैं। उनकी ताकत भी बीते चार वर्षों में बढ़ी है। उनकी सतर्क नजर ईरान पर लगातार बनी हुई है। ये भी देखा गया कि शिखर सम्मेलन में हिजबुल्लाह और हमास महज फुटनोट थे। इसकी वजह ये है कि क्राउन प्रिंस एमबीएस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।











