ताइवान में बुजुर्गों की तादाद लगातार बढ़ रही है। वहां कामगारों की सख्त जरूरत है। दूसरी ओर भारत में आबादी के हिसाब से रोजगार पैदा नहीं हो पा रहे हैं। अनुमान है कि ताइवान साल 2025 तक सुपर एज्ड सोसाइटी बन जाएगा। वहां की आबादी में बुजुर्गों की संख्या 20 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लेकिन इस डील से चीन के साथ तनाव बढ़ना तय है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इससे दोनों देशों के बीच कई साल से तनाव चल रहा है। चीन नहीं चाहता कि कोई भी देश ताइवान के साथ कोई आर्थिक रिश्ता रखे। भारत के साथ उसके पहले से ही सीमा को लेकर विवाद चल रहा है।
ताइवान की इकॉनमी
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि भारत-ताइवान जॉब डील अंतिम चरण में है। इस बारे में ताइवान की लेबर मिनिस्ट्री ने इस डील पर टिप्पणी नहीं की। लेकिन उसका कहना है कि ताइवान उन देशों के साथ सहयोग का स्वागत करता है जो उसे लेबर दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत से जो लोग ताइवान जाना चाहते हैं, उनकी हेल्थ को सर्टिफाई करने के लिए एक मैकेनिज्म पर काम चल रहा है। ताइवान में बेरोजगारी दर साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। ताइवान की इकॉनमी 790 अरब डॉलर की है और इसे बनाए रखने के लिए देश को लेबर्स की जरूरत है।जानकारों का कहना है कि इस डील के तहत ताइवान भारतीय कामगारों को स्थानीय वर्कर्स के बराबर सैलरी और इंश्योरेंस पॉलिसीज ऑफर कर रहा है। भारत सरकार ने कई ऐसे देशों के साथ ऐसी डील की है जहां वर्कफोर्स बुजुर्ग हो रहा है। अब तक जापान, फ्रांस और यूके सहित 13 देशों के साथ इस तरह की डील हो चुकी है। साथ ही नीदरलैंड, ग्रीस, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड के साथ इस तरह की मैकेनिज्म पर काम हो रहा है।











