कहानी बरनॉल की जलन से राहत देने वाला मलहम कब ट्रोल्स का हथियार बन गया, पता भी नहीं चला

कहानी बरनॉल की  जलन से राहत देने वाला मलहम कब ट्रोल्स का हथियार बन गया, पता भी नहीं चला
नई दिल्ली: दुनिया में जलने वालों की कमी नहीं और बुझाने वालों की तो बिल्कुल नहीं। यूं तो इसका अविष्कार आग से जलने पर होने वाले जलन को कम करने के लिए हुआ था, लेकिन आज के डिजिटल दौर में वर्चुअल फाइटर्स ने इसे नया रूप दे दिया है। आज के दौर में कोई अगर किसी को देखकर जलता है तब जले पर नमक नहीं छिड़का जाता, बल्कि उसे बरर्लॉन (Burnol) लगाता है। जिसका काम कभी जलन से राहत देना, आग बुझाने का था, अब वो आग लगाने का काम कर रहा है। जो कभी हमारे घर में मौजूद फ़र्स्ट-ऐड बॉक्स का साथी था, आज वो सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का हथियार बन गया है।

​कहानी बरनॉल की

साल 1960 में बरनॉल का जन्म हुआ। Reckitt Benckiser नाम की कंपनी ने लोगों की जरूरत को देखते हुए एक ऐसी क्रीम बनाई, जो शरीर के किसी हिस्से के आग या भाप से जलने पर होने वाली जलन से राहत देती थी। ये वही कंपनी है जो डिटॉल (Dettol), लाइजॉल (Lysol), वीट (Veet), ड्यूरेक्स (Durex) आदि बनाती है। भारत में उस वक्त चूल्हे, स्टोव और कोयले पर खाना बनता था। इस दौरान अक्सर महिलाओं की उंगलियां, हाथ जल जाती थी। उस जलन में बरनॉल बढ़िया काम करता था। धीरे-धीरे इसने अधिकांश भारतीय घरों में जगह बना ली। लोगों के घरों में पुदीन हरा, ठंडा तेल , विक्स के साथ-साथ बरनॉल ने भी जगह ले ली।

​‘हाथ जल गया, शुक्र है घर में बरनॉल है’

बरनॉल की डिमांड बढ़ी तो कंपनी ने विज्ञापन पर खर्च भी शुरू कर दिया। 1970 के दशक में टीवी, अखबार, रेडियो पर बरनॉल के खूब विज्ञापन आते थे। एक विज्ञापन भी आपको भी याद होगा जब छोटी बच्ची को खिलौना बताता है कि उसका हाथ जलेगा और मां बरनॉल लगाएगी। ‘हाथ जल गया, शुक्र है घर में बरनॉल है’ काफी पॉपुलर हुआ था। बरनॉल ऐंटीसेप्टिक क्रीम को साल 2001 में इसे Dr Morepen ने लगभग 9 करोड़ में ख़रीद लिया। डॉ मोरेपेन के हाथों में आने के बाद बरनॉल के विज्ञापनों पर खर्च बढने के साथ-साथ सेल भी बढ़ा। तीन महीनों में ही बरनॉल की सेल 4 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले पूरे साल के सेल का 80 फीसदी था।

​पांच सालों से कोई विज्ञापन नहीं

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों से बरनॉल ने विज्ञापन पर कोई खर्च नहीं किया। बरनॉल का कोई नया विज्ञापन पिछले कई सालों ने नहीं आया है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि फिर भी यह तीन सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड में शामिल है। साल दर साल इसकी सेल में 11 फीसदी की तेजी देखने को मिली। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के मुताबिक पिछले साल बरनॉल की सेल 10 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। विज्ञापन से कंपनी का सेल बढ़ रहा है। जबकि बाकी दो ब्रांड मेगनानो (Meganano) और वेनिज़ा (Vaniza) की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। मेगनानो की सेल बीते साल 3.40 लाख यूनिट्स रही तो वेनिजा की सेल 91000 यूनिट्स रही।

​अपने आप हो रहा प्रचार​

बरनॉल के सेल में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह सेल्फ प्रमोशन है। ट्विटर और सोशल मीडिया पर अक्सर #burnol ट्रेंड करता रहा है। भले ही निगेटिव सेंस में, लेकिन कंपनी का सेल्फ प्रमोशन हो रहा है। इसका असर उसकी सेल पर देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत तक बरनॉल का प्रमोशन हो रहा है। चाहे ट्विटर हो, फ़ेसबुक हो या इंस्टाग्राम ‘बरनॉल लगा ले’ ट्रोल्स का नया हथियार बन गया है। सिर्फ ट्रोलिंग के लिए ही नहीं बल्कि यार-दोस्त से लेकर व्हाट्सप ग्रुप पर ये धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। कभी भी कुछ हो, सोशल मीडिया पर #burnol ट्रेंड करने लगता है।

​पहले से लेकर अब तक में अंतर​

पहले जहां आग या भाप से जल जाने पर बरनॉल लगाने की हिदायत दी जाती थी, वहीं अब सोशल मीडिया पर इसे किसी का विरोध करने के लिए, अपना ओपिनियन रखने के लिए, किसी को जलाने के लिए तो किसी के जलन को कम करने के लिए लोग नमक ही जगह बरनॉल लगाते हैं।
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