तो ना होती मामाअर्थ की शुरुआत..
मामाअर्थ की शुरुआत कैसे हुई, यह कहानी बड़ी दिलचस्प है। अगर भारत में उस समय टॉक्सिन फ्री बेबी प्रोडक्ट्स मिल रहे होते, तो मामाअर्थ आज अस्तित्व में नहीं होता। गजल अलघ को जब अपने बेटे के लिए टॉक्सिन फ्री प्रोडक्ट नहीं मिले, तो उन्हें टॉक्सिन फ्री बेबी प्रोडक्ट्स बनाने का आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने अपने पति वरुण के साथ मिलकर साल 2016 में होनासा कंज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड नाम से स्टार्टअप शुरू कर दिया।बेटे के लिए विदेशों से मंगवाने पड़ते थे प्रोडक्ट्स
दरअसल, गजल अलघ के बेटे अगस्त्य को जन्म से ही स्किन प्रॉब्लम थी। टॉक्सिन वाला कोई भी प्रोडक्ट यूज करते ही उसकी स्किन खराब हो जाती थी। अपने बेटे के लिए गजल को भारत में टॉक्सिन फ्री प्रोडक्ट्स नहीं मिल रहे थे। उन्हें विदेशों से ये प्रोडक्ट मंगाने पड़ते थे। गजल और उनके पति वरुण अपने विदेश से आ रहे दोस्तों से ये प्रोडक्ट मंगवाते थे। गजल ने देखा कि कई पैरेंट्स इस समस्या का सामना कर रहे थे। फिर उन्होंने खुद टॉक्सिन फ्री बेबी प्रोडक्ट्स बनाने का तय किया।
स्टार्टअप के लिए नौकरी छोड़ी
मामाअर्थ की को-फाउंडर गजल ने साल 2010 में पंजाब यूनिवर्सिटी से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से बीसीए की थी। इसके अलावा उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट से इंटेंसिव कोर्स भी किया। इसके बाद वे आईटी सेक्टर में कॉर्पोरेट ट्रेनर के रूप में काम करने लगीं। वहीं, पति वरुण कोका कोला में सीनियर ब्रांड मैनेजर थे। जब स्टार्टअप शुरू करने की बारी आई, तो दोनों ने नौकरी छोड़ दी।
अब आ गए हैं कई प्रोडक्ट्स
बेबीकेयर प्रोडक्ट्स से शुरू हुए मामाअर्थ के पास अब काफी बड़ी प्रोडक्ट रेंज है। मामाअर्थ में अब बेबीकेयर, स्किन केयर और ब्यूटी सेगमेंट में कई सारे प्रोडक्ट हैं। मामाअर्थ ही नहीं डर्मा को (The Derma Co) और बीब्लंट (BeBlunt) भी होनासा के ही ब्रांड हैं। होनासा कंज्यूमर साल 2022 में यूनिकॉर्न बन गई थी।











