शीतल देवी का जन्म जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक साधारण परिवार में हुआ। शीतल बिना हाथों के जन्मी। यही कारण है कि उन्हे शुरुआती जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। साल 2019 से पहले शीतल देवी का जीवन काफी मुश्किलों में बीता लेकिन, इसके जब एक सैन्य शिविर में भारतीय सेना द्वारा उनकी प्रतिभा पहचना तब उन्होंने पूरी दुनिया को दिखाया कि वह बिना हाथ के भी बुलंदियों को छू सकती हैं। भारतीय सेना के द्वारा ना सिर्फ आर्चरी की ट्रेनिंग दी गई बल्कि उनकी पढ़ाई और चिकित्सा का भी खर्चा उठाया। इसके बाद शीतल को पैरालंपिक तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान ने ट्रेनिंग दी। शीतल ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से कई उपलब्धियां हासिल की उसी में से एक 2023 विश्व तीरंदाजी पैरा चैंपियनशिप में जीता गया सिल्वर मेडल भी है।
बता दें कि शीतल का सफर खेल से कहीं आगे की है। शीतल पूरी दुनिया के लिए साहस और दृढ़ता का प्रतीक हैं। उनकी कहानी दुनिया भर में अनगिनत लोगों को प्रेरित करती है। शीतल ने पूरी दुनिया को यह दिखाया कि दृढ़ता और समर्थन के साथ किसी भी बाधा को दूर किया जा सकता है। उनकी विरासत तीरंदाजी रेंज से आगे तक फैली है, जो एक पीढ़ी को चुनौतियों को स्वीकार करने और अपने सपनों का दृढ़ता से पीछा करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
शीतल देवी की उपलब्धियां
शीतल देवी ने नेशनल और इंटरनेशनल पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। शीतल ने एशियन पैरा आर्चरी चैंपियनशिप 2023 के मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा में शीतल ने सिल्वर जीता था। वहीं 2023 वर्ल्ड पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में शीतल ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा एशियन पैरा गेम्स 2022 में शीतल के नाम मिक्स्ड और सिंगल्स में गोल्ड जबकि महिला टीम में सिल्वर रहा था।











