पाकिस्तानी परमाणु छतरी के नीचे आया सऊदी अरब, कतर पर इजरायल हमले से खौफ, NATO जैसे समझौते की असल वजह जानें

पाकिस्तानी परमाणु छतरी के नीचे आया सऊदी अरब, कतर पर इजरायल हमले से खौफ, NATO जैसे समझौते की असल वजह जानें
रियाद: सऊदी अरब ने बुधवार को परमाणु हथियारों से लैस इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान के साथ एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन NATO की तरह बताया जा रहा है। नाटो की तरह ही सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते में कहा गया है कि दोनों में से किसी भी देश के ऊपर हमला दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा। यह समझौता ऐसे समय में किया गया है, जब कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देश डरे हुए हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी से उनका भरोसा उठ रहा है।

सऊदी को मिली पाकिस्तान की परमाणु छतरी

इस समझौते के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल के हमले से डरा सऊदी अरब ने पाकिस्तान की परमाणु छतरी (सुरक्षा) पाने के लिए इस पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जब यही सवाल पूछा तो एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने कहा, 'यह एक व्यापक रक्षा समझौता है, जिसमें सभी सैन्य साधन शामिल हैं।' पाकिस्तान ने कहा कि यह समझौता 'दोनों देशों की अपनी सुरक्षा बढ़ाने और क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांति स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।'
फाइनेंशियन टाइम्स ने एक सऊदी अधिकारी के हवाले से बताया कि इस समझौते पर 2-3 साल से चर्चा चल रही थी। हालांकि, इस पर हस्ताक्षर तब गिए गए जब खाड़ी के सुन्नी देश पिछले सप्ताह कतर पर इजरायली हमले से हैरत में हैं। मिडिल ईस्ट आई ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि ट्रंप प्रशासन ने हमले को पहले से मंजूरी दी थी। यही वजह है कि अब खाड़ी के सुन्नी देश अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
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