PoK में बवाल के बीच पाकिस्तान कराने जा रहा विधानसभा चुनाव, शहबाज का मंसूबा हो पाएगा कामयाब?

PoK में बवाल के बीच पाकिस्तान कराने जा रहा विधानसभा चुनाव, शहबाज का मंसूबा हो पाएगा कामयाब?
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) पिछले 1 महीने से ज्यादा समय से उबल रहा है। इलाके में पाकिस्तानी शासन के शोषण और दमन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब जुलाई के आखिर में यहां विधान चुनाव होने वाले हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से स्थानीय लोगों को कोई समाधान मिलने की उम्मीद कम ही है। ज्यादातर स्थानीय लोगों का मानना है कि ये चुनाव पाकिस्तान के लिए दिखावा से अधिक कुछ नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान को इस चुनाव से कोई राहत नहीं मिलने वाली है।

PoK में कब हैं चुनाव?

पीओके में 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में चुनाव होने हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले इस इलाके में 53 सदस्यों वाली विधानसभा की 45 सीटें सीधे चुनाव से भरी जाती हैं। इनमें PoK में 33 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र और पाकिस्तान के अंदर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें हैं। इसके अलावा 8 सीटें मनोनीत हैं। स्थानीय लोग शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं और इसे पाकिस्तान की अपने लोगों को विधानसभा में घुसाने की कोशिश के तौर पर देखते हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ PoK में गुस्सा

चुनाव ऐसे समय पर हो रहे हैं जब इलाके में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। एक महीने से ज्यादा समय से जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के नेतृत्व में महंगे राशन, बिजली को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने भारी बल प्रयोग किया है। इन झड़पों में दर्जनों आम नागरिक मारे गए हैं।

पाकिस्तानी सेना का दमन चक्र

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नाकेबंदी करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने झुकने से इनकार कर दिया है। प्रदर्शनकारी नेताओं ने पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ खुलेआम आवाज उठाई है। यहां तक कि संकट से निपटने के लिए भारत से मदद की गुहार भी लगाई है।इसी महीने की शुरुआत में सरदार अमान खान ने पाकिस्तान के कश्मीर प्रोपेगैंडा को खारिज करते हुए कहा था कि इस्लामाबाद ने 78 सालों तक कश्मीर को चूरन बेचा लेकिन अब यह और नहीं बिकने वाला है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर नाकेबंदी का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके चलते खाने-पीने की जरूरी चीजों और दवाइयों की भारी कमी हो गई है।
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