आपको बता दें कि द्ज़्योमगी एयर बेस कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर में गागरिन एयरक्राफ्ट प्लांट के पास है, जिसे कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर एयरक्राफ्ट प्लांट के नाम से भी जाना जाता है। यहां सभी Su-35 और Su-57 सीरियल प्रोडक्शन मॉडल, फाइनल असेंबली से गुजरते हैं। एयरक्राफ्ट की पहली रेजिमेंट को इस फैसिलिटी के पास स्थायी बेस करने से उनके शुरुआती ऑपरेशन के दौरान, आने वाली दिक्कतों को ज्यादा आसानी से ठीक किया जा सका है।
जापान के करीब Su-57 स्टील्थ विमानों की तैनाती
हालांकि इन सबके बावजूद इस फैसिलिटी में Su-57 को फिर से तैनात करने से आगे के मकसदों के बारे में काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। एक संभावना यह है कि इसका मकसद पड़ोसी जापान को एक संदेश देना हो सकता है। क्योंकि प्रधानमंत्री साने ताकाइची के सत्ता में आने के बाद संभावना है कि जापान अमेरिका के साथ और मजबूती से अलायंस बनाएगा। अमेरिका, जापान के रास्ते चीन और रूस दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर सकता है। Su-57 लड़ाकू विमानों को Su-35 फाइटर्स और MiG-31 इंटरसेप्टर्स के साथ बेस पर तैनात करने से नए स्टेल्थ एयरक्राफ्ट को पुराने टाइप के एयरक्राफ्ट्स के साथ ऑपरेट करने की ट्रेनिंग मिल सकती है।
हालांकि इन सबके बावजूद इस फैसिलिटी में Su-57 को फिर से तैनात करने से आगे के मकसदों के बारे में काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। एक संभावना यह है कि इसका मकसद पड़ोसी जापान को एक संदेश देना हो सकता है। क्योंकि प्रधानमंत्री साने ताकाइची के सत्ता में आने के बाद संभावना है कि जापान अमेरिका के साथ और मजबूती से अलायंस बनाएगा। अमेरिका, जापान के रास्ते चीन और रूस दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर सकता है। Su-57 लड़ाकू विमानों को Su-35 फाइटर्स और MiG-31 इंटरसेप्टर्स के साथ बेस पर तैनात करने से नए स्टेल्थ एयरक्राफ्ट को पुराने टाइप के एयरक्राफ्ट्स के साथ ऑपरेट करने की ट्रेनिंग मिल सकती है।











