गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि IOCL, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्टडीज में पाया गया कि BS-VI गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ टेस्ट किए जाने पर भी एमिशन नॉर्म्स यानी उत्सर्जन मानकों को पूरा करती हैं। स्टडीज में कार और टू-व्हीलर के इंजन में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं दिखी।
पुरानी गाड़ियों की परेशानी
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "इन स्टडीज से पुष्टि हुई कि पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस में भी कोई खास अंतर नहीं आया और न ही E20 फ्यूल के इस्तेमाल से उनमें कोई असामान्य गड़बड़ी देखी गई। गाड़ी चलाने में आसानी (ड्राइवैबिलिटी), स्टार्ट होने की क्षमता (स्टार्टैबिलिटी), मेटल और प्लास्टिक के साथ तालमेल (कम्पैटिबिलिटी) जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं पाई गई।"हालांकि उन्होंने कहा कि 2016 से पहले बनी BS-III गाड़ियों के टेस्ट से संकेत मिला है कि उनमें कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं। ARAI की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि E20 फ्यूल से E10 के अनुकूल गाड़ियों में रबर के पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।











