जानीमानी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट 'अनलॉकिंग एक्सेस: जर्नी टू क्रेडिट एक्सपैंशन इन इंडिया' के मुताबिक देश में क्रेडिट-एलिजिबल पॉपुलेशन की संख्या 2017 में 79 करोड़ से बढ़कर 2026 में 89 करोड़ हो गई। इनमें कम से कम एक बार औपचारिक कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 74% पहुंच गई। यह देश में औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक लोगों की बढ़ती पहुंच को दिखाता है।
यूपी-बिहार और मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ रही कर्ज लेने वालों की संख्या, पीछे छूटे दक्षिणी राज्य
नई दिल्ली: देश में फॉर्मल क्रेडिट तक लोगों की पहुंच पिछले नौ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। फॉर्मल क्रेडिट का मतलब है बैंक, क्रेडिट यूनियन और कोऑपरेटिव सोसाइटी जैसी रेगुलेटेड संस्थाओं से मिलने वाला लोन। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में कर्ज लेने वालों की संख्या पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है। इस दौरान महिलाओं, युवाओं और नॉन-मेट्रो क्षेत्रों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जानीमानी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट 'अनलॉकिंग एक्सेस: जर्नी टू क्रेडिट एक्सपैंशन इन इंडिया' के मुताबिक देश में क्रेडिट-एलिजिबल पॉपुलेशन की संख्या 2017 में 79 करोड़ से बढ़कर 2026 में 89 करोड़ हो गई। इनमें कम से कम एक बार औपचारिक कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 74% पहुंच गई। यह देश में औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक लोगों की बढ़ती पहुंच को दिखाता है।
सबसे ज्यादा लोन
इस दौरान पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन जैसे उपभोग संबंधी कर्ज सबसे लोकप्रिय श्रेणी के रूप में उभरे हैं। मार्च 2017 में 34% सक्रिय कर्जधारकों के पास इस श्रेणी के उत्पाद थे, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 51% हो गए। वहीं, इन उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या भी नौ वर्षों में चार गुना हो गई।
वहीं, कारोबार से जुड़े कर्ज में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मार्च 2017 में जहां 3% सक्रिय कर्जधारकों ने इस श्रेणी के कर्ज ले रखे थे, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 9% हो गया। इस अवधि में ऐसे कर्ज लेने वालों की संख्या 10 गुना बढ़ी, जो अध्ययन में शामिल सभी श्रेणियों में सबसे तेज वृद्धि रही। इसके मुकाबले गोल्ड लोन लेने वालों की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 22% हुई, जबकि वाहन ऋण और मॉर्गेज प्रोडक्ट्स की वृद्धि लगभग स्थिर रही।
जानीमानी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट 'अनलॉकिंग एक्सेस: जर्नी टू क्रेडिट एक्सपैंशन इन इंडिया' के मुताबिक देश में क्रेडिट-एलिजिबल पॉपुलेशन की संख्या 2017 में 79 करोड़ से बढ़कर 2026 में 89 करोड़ हो गई। इनमें कम से कम एक बार औपचारिक कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 74% पहुंच गई। यह देश में औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक लोगों की बढ़ती पहुंच को दिखाता है।











