टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपोर्ट में तेजी की मुख्य वजह यह रही कि अमेरिका को बड़े पैमाने पर आईफोन का एक्सपोर्ट किया गया। इससे एक बात तो साफ हो गई कि ऐपल के लिए भारत अब एक अहम ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभर रहा है। इस दौरान कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी पिछले साल के मुकाबले 24.6 फीसदी बढ़ा। इसमें स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 64.8 फीसदी रही।
अमेरिका को सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट
अमेरिका भारतीय स्मार्टफोन के लिए सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बना रहा। अप्रैल-मई के दौरान भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट वैल्यू में इसकी हिस्सेदारी 71% रही, क्योंकि ऐपल अमेरिकी बाजार के लिए अपना प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट करता रहा। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, स्मार्टफोन एक्सपोर्ट फाइनेंशियल ईयर 2026 के $29 अरब से बढ़कर इस फाइनेंशियल ईयर में $35 अरब तक पहुंच सकता है।हालांकि, इंडस्ट्री के अधिकारियों और एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि साल के बाकी समय में इस तेजी को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसके तीन मुख्य कारण हैं - ग्लोबल डिमांड में कमी, कंपोनेंट की बढ़ती लागत और भारत में ऐपल के आने वाले फोल्डेबल आईफोन का प्रोडक्शन न होना।
रेकॉर्ड गिरावट
साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) के वीपी प्रभु राम ने कहा कि भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट को ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट से फायदा मिल रहा है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ग्रोथ को बनाए रखना ग्लोबल डिमांड पर निर्भर करेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में 11% गिरावट आई और यह 2013 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।इस गिरावट की मुख्य वजह मेमोरी-चिप की लगातार कमी और कंपोनेंट की बढ़ती लागत है। इसके कारण मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों पर डालनी पड़ी हैं। इस साल स्मार्टफोन शिपमेंट में 13.9% की रेकॉर्ड गिरावट का अनुमान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मेमोरी शॉर्टेज की समस्या 2027 तक बनी रहने की आशंका है।











