कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दर्ज कागजात के मुताबिक 23 दिसंबर को हुई एक खास आम बैठक में शेयरधारकों ने 11,000 करोड़ रुपये तक का फंड जुटाने की योजना को मंजूरी दे दी थी। उम्मीद की जा रही है कि जेप्टो अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) सेबी की गोपनीय सुविधा के तहत फाइल करेगी। इस सुविधा से कंपनी को बाद में अपने आईपीओ का साइज बदलने की छूट मिल जाएगी। जेप्टो ने इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
लीड बैंकर
RoC की फाइलिंग के अनुसार, जेप्टो ने वित्त वर्ष 2025 में 9,669 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल से 129% ज्यादा है। हालांकि, इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा भी लगभग तीन गुना बढ़कर 3,367 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल 1,214 करोड़ रुपये था। चार साल पुरानी यह कंपनी अगले साल जुलाई-सितंबर तिमाही में शेयर बाजार में लिस्ट होने की योजना बना रही है। इस IPO को मैनेज करने के लिए जेप्टो ने कई बड़े बैंकों को हायर किया है। इनमें मॉर्गन स्टेनली, एक्सिस कैपिटल, एचएसबीसी, गोल्डमैन सैश, जेएम फाइनेंशियल, आईआईएफएल सिक्योरिटीज और मोतीलाल ओसवाल शामिल हैं। मॉर्गन स्टेनली इस इश्यू का लीड बैंकर है।कंपनी ने IPO फाइलिंग की तैयारी के तहत अपने खर्चों को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने लगभग 800-900 कर्मचारियों की छंटनी की है और खाली पदों को नहीं भरा है। इसके अलावा ग्राहकों को जोड़ने की लागत और कॉर्पोरेट खर्चों में भी कटौती की है। जेप्टो की दो बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां ब्लिंकिट और स्विगी हैं। ब्लिंकिट की पेरेंट कंपनी ईटरनल (जोमैटो) है जबकि स्विगी इंस्टामार्ट की पैरेंट कंपनी है। ईटरनल और स्विगी पहले ही लिस्ट हो चुकी हैं।











