भोपाल। सिंध से चली आ रही सिंधी भगत यानी लोक संगीत की परंपरा अब लुप्त होती जा रही है। राजावीर विक्रमादित्य समिति इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास करेगी। शनिवार को संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में तीन दिनी महोत्सव का शुभारंभ सिंधी भगत के साथ हुआ। इस मौके पर समिति के सदस्यों ने भगत को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
संत हिरदाराम नगर में पिछले 60 साल से मनाए जा रहे राजावीर विक्रमादित्य महोत्सव के तहत शुक्रवार को सिंधी लोक-संगीत एवं भक्ति कार्यक्रम हुआ। स्व. प्रेमचंद तेजवानी, स्व. नारीमल नरियानी एवं स्व. रूपचंद रायचंदानी की स्मृति में भक्ति संगीत हुआ। महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ शनिवार को वेदांत संत लाल साईं एवं राजेश हिंगोरानी ने किया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष किशोर तेजवानी, नारी तनवानी, चन्दू भैया, दिनेश वाधवानी, ईश्वर लाल हिमथानी, मोहन लालवानी, महेश खटवानी, राम परदासनी, सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
शाम को भक्ति संगीत कार्यक्रम
आज इस महोत्सव के तहत रात्रि आठ बजे प्रसिद्ध भक्ति गायक परमानंद प्यासी भक्ति गीतों को स्वर देंगे। रविवार यानी 17 मार्च को भगत मोहनलाल का भक्ति संगीत होगा। 18 मार्च को महोत्सव का समापन होगा। इसरानी मार्केट स्थित राजावीर मंदिर में भी महोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। बहिराणा पूजन किया जाएगा। यहां भी लोक संगीत कार्यक्रम होगा।
लुप्त हो रही भगत की परंपरा
सिंध में मंदिरों में उत्सव की शुरुआत सिंधी लोक संगीत यानी भगत के साथ होती थी। महान संत कंवरराम साहब के लोकगीत आज भी सिंधी समाज के घरों में सुने जाते हैं, लेकिन लोक गायकों की संख्या कम हो गई है। राजावीर विक्रमादित्य समिति अब हर साल सिंधी लोक गायकों को आमंत्रित करेगी। समिति के अध्यक्ष किशोर तेजवानी एवं नारी तनवानी का कहना है कि हम सिंधी भगत परंपरा को लुप्त नहीं होने देंगे।











