बचपन में खेती से रखा गया दूर
भोदाणी में जन्मे सत्यजीत हांगे और अजिंक्य हांगे पुणे में पले-बढ़े। उन्होंने शहर के ही एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई की। लेकिन, छुट्टियों के दौरान वे पुणे से 150 किमी (3 घंटे) दूर इंदापुर तालुका के भोदाणी गांव में अपने फार्म पर जाते थे। वहां उनके पिता उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए खेती करते थे। खेती-बाड़ी वाले परिवार से होने के बावजूद इन भाइयों को बचपन से ही खेती से दूर रखा गया था।
नौकरी छोड़ने का लिया फैसला
कंप्यूटर साइंस और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद दोनों भाइयों ने पुणे यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) में मास्टर्स किया। उन्हें पुणे में ही टॉप मल्टी नेशनल कंपनियों (MNC) में नौकरी मिल गई। सत्यजीत को कोटक बैंक और अजिंक्य को HDFC Bank में जॉब मिली। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर में लगभग एक दशक तक काम किया। इसके बाद उन्होंने ऑर्गेनिक खेती करने के लिए अपनी नौकरियां छोड़ने का फैसला किया। यह फैसला काफी रिस्की था। लेकिन, उन्होंने तय किया कि वे इस रिस्क को उठाएंगे। इसके पीछे शांत और धीमी रफ्तार वाली जिंदगी जीने की इच्छा अहम थी।
छोटी थी शुरुआत
दोनों भाई 2012 में नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट आए। फिर पूरी तरह से खेती करना शुरू किया। 2017 में उन्होंनें 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' (TBOF) की शुरुआत की। हांगे भाइयों ने शुरुआत में जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर काम शुरू किया था। लेकिन, आज वे 20 एकड़ के फार्म पर ऑर्गेनिक खेती करते हैं। वे खेती के पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। खाद के रूप में गाय के गोबर का उपयोग करते हैं। दोनों मिलकर चावल, घी, दाल, गुलकंद, च्यवनप्राश और लड्डू जैसे कई तरह के ऑर्गेनिक उत्पाद बेचते हैं। इसके अलावा, 14 से भी ज्यादा देशों के लोग उनके फार्म पर आकर उनकी ऑर्गेनिक खेती के तरीके सीखने आए हैं। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के यात्री, किसान, मीडिया विशेषज्ञ और बैंकर शामिल हैं।
अब करोड़ों का कारोबार
अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच इस स्टार्टअप ने 130 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा 'सस्टेनेबल क्लीन फूड पार्क' को बनाने में खर्च किया जा रहा है। यह 40-50 एकड़ में फैला होगा। यहां 100% इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग होगी। साथ ही किसानों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब भी बनाई जाएगी। ब्रांड अब दुबई के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और प्रीमियम रिटेल स्टोर्स में भी अपनी पैठ बना रहा है। भाइयों का टारगेट 2030 तक 50,000 किसानों के साथ जुड़ना और 2,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा छूना है। वे अब तक 5,000 किसानों की आय में 25-40% की बढ़ोतरी कर चुके हैं। इसके लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने सम्मानित भी किया है।











