H-1B वीजा को बेदम करने की तैयारी? अब साल 2027 में इंटरव्यू डेट, भारतीयों के लिए अमेरिका का रास्ता बंद!

H-1B वीजा को बेदम करने की तैयारी? अब साल 2027 में इंटरव्यू डेट, भारतीयों के लिए अमेरिका का रास्ता बंद!
वॉशिंगटन: अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा का भरोसेमंद रास्ता बंद होता दिख रहा है। ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम सख्त करने और फीस में भारी बढ़ोतरी के बाद आवेदकों को अब नई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीयों का वीजा के लिए इंटरव्यू ही नहीं लिया जा रहा है। भारत में अमेरिकी दूतावासों ने वीजा-स्टैंपिंग इंटरव्यू की तारीखें अगले साल तक बढ़ा दी हैं। इससे भारतीयों के करियर से लेकर निजी जिंदगी तक पर असर हो रहा है।

फाइनेंशिल एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े भारतीय शहरों में काउंसलर ऑफिस में रेगुलर इंटरव्यू स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं। इससे आवेदकों को पता नहीं चल रहा है कि वे अमेरिका कब लौट पाएंगे। इसकी शुरुआत बीते साल दिसंबर में हुई थी, जब H-1B इंटरव्यू मार्च 2026 के लिए रीशेड्यूल किए गए। इसे तब अस्थायी बदलाव बताया गया लेकिन अब चीजें बद से बदतर होती जा रही हैं।

इंटरव्यू को क्यों खिसकाया जा रहा है

इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को पहले मार्च 2026 और फिर अक्टूबर 2026 तक बढ़ाया गया। हाल ही में इसे 2027 तक बढ़ा दिया गया। इस जनवरी और फरवरी में इंटरव्यू की तारीख वाले आवेदकों ने बताया है कि उन्हें ऑफिशियल ईमेल मिले हैं। इसमें बताया गया है कि उनके अपॉइंटमेंट अप्रैल-मई 2027 तक टाल दिए गए हैं। इससे उनके अमेरिका जाने पर अनिश्चित्ता हो गई है।
इस समस्या की जड़ में ट्रंप प्रशासन के H-1B सिस्टम में बदलाव को माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2025 को अमेरिका की सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए नए नियम जारी किए। इसमें सालाना कैप 85,000 वीजा पर अपरिवर्तित है लेकिन सख्ती की बात की गई है। प्रशासनिक और अनुपालन बदलाव ने सिस्टम को बहुत ज्यादा धीमा कर दिया है।

भारतीयों का रास्ता बंद कर रहा अमेरिका?

वीजा इंटरव्यू के लगातार टाले जाने से इस बात पर चर्चा बढ़ गई है कि क्या भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए H-1B का रास्ता प्रभावी रूप से बंद हो रहा है। कई लोगों का कहना है कि अमेरिका को काम या उच्च शिक्षा के लिए भरोसेमंद डेस्टिनेशन के रूप में अब नहीं देखना चाहिए। कम से कम भारतीयों को तो दूसरे विकल्पों पर विचार कर लेना चाहिए।
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