योग का अभ्यास न केवल बाल शरीर को स्वस्थ और लचीला बनाता है - योग गुरु महेश अग्रवाल

योग का अभ्यास न केवल बाल शरीर को स्वस्थ और लचीला बनाता है - योग गुरु महेश अग्रवाल
आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र कोलार रोड़ भोपाल के योग गुरु महेश अग्रवाल ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इंडस गार्डन कॉलोनी फेज एक बाबड़िया कलां के बच्चों का योग अभ्यास के आसनों का प्रदर्शन एवं प्रतियोगिता रखी गई जिसका नगद पुरुस्कार राशि कॉलोनी अध्यक्ष एवं पूर्व  भारतीय वन सेवा अधिकारी श्री रमन श्रीवास्तव द्वारा दी गई। प्रतियोगिता का सयोंजन श्री राजेंद्र खले एवं श्री रमेश साहू  द्वारा किया गया। इस अवसर पर  शिरीष शर्मा, अथर्व कँसाना, व दृश्यम कोरी, को प्रथम पुरस्कार प्रखर, बिट्टू, प्रचीति कुलकर्णी को द्वितीय एवं आदित्य सिंह, आराध्या व आरोही मोदी तृतीय पुरस्कार दिया गया।  प्रतियोगिता के दौरान  स्पर्श श्रीवास्तव 
सक्षम, वैदेही सिंह, सांगवी सिंह सहित 16 बच्चों ने  योग आसनों का प्रदर्शन सफलता पूर्वक किया । इस अवसर पर कॉलोनी सचिव श्री पुगलेंदी जी  एवं श्रीमती  सुनीता जैन के साथ इंडस गार्डन सोसायटी के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे। विजयी प्रतिभागियों के द्वारा योगा के कठिन आसन जैसे शीर्षासन, हलासन, पूर्ण उष्ट्रासन, मत्सयासन का प्रदर्शन कर सभी को चमत्कृत कर दिया।

योग गुरु अग्रवाल ने कहा कि योग अभ्यास बच्चों में छिपी सृजनात्मक क्षमताओं को भी उत्प्रेरित करते हैं। छः वर्ष से कम वय के बच्चों की कल्पनाशीलता का विस्तार प्रायः खिलौनों और परी कथाओं के माध्यम से किया जाता है। लेकिन हम उनके वातावरण से अधिक तालमेल बैठाते हुए इस यथार्थ जगत् का सामना करने योग्य बनाने के लिए उन्हें वास्तविक वस्तुओं के द्वारा कल्पना करने दे सकते हैं। बच्चे अधिक अंतर्दशीं और वयस्कों की अपेक्षा कम अनुकूलित होते हैं, इसलिए वे अपेक्षाकृत खुले मन के, निष्कपट, सृजनात्मक और विशेष रूप से सीखने में सक्षम होते हैं। योग मनोविज्ञान के अनुसार ऐसा होने का कारण यह है कि बाल्यावस्था में शीर्ष ग्रंथि का क्षय आरंभ नहीं होता है और योग के अभ्यास क्षय की इस प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। बच्चा जब बड़ा होकर विद्यालय में प्रवेश करता है, तब वे योगाभ्यास विद्यालय में उसकी सीखने की क्षमता को बढ़ाते हैं और नियमित अनुशासन बढ़ते हुए बच्चे की भावनात्मक ऊर्जा को रचनात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
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