दो महीने से किया जा रहा था चंचल हथिनी का इलाज

दो महीने से किया जा रहा था चंचल हथिनी का इलाज
जबलपुर। करीब दो महीने से बीमार चंचल नाम की हथिनी की रविवार की देर रात मौत हो गई। इस हथिनी का वेटरनरी अस्पताल के डाक्टरों की देखरेख में इलाज किया जा रहा था। डाक्टरों का कहना है कि हथिनी को यूरिनरी इंफेक्शन रहा, जिसका उपचार यहां की टीम द्वारा किया जा रहा था। मौत के बाद हथिनी का पोस्टमार्टम कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

कथा के दौरान चंचल स्वस्थ रही

करीब ढाई महीने पहले चंचल नाम की हथिनी को छतरपुर से पनागर में आयोजित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के दौरान यहां बुलवाया गया था। महावत गोविंद गिरी ने बताया कि कथा के आयोजन के दौरान चंचल स्वस्थ रही। करीब महीने भर वो उसे लेकर जबलपुर में घूमे भी। इस बीच उसे डिहाईड्रेशन की शिकायत हुई, तो उसका उपचार पशु चिकित्सा महाविद्यालय में कराया गया। कुछ दिनों में वह स्वस्थ हो गई। 16 मई को हथिनी चंचल को लेकर कुंडम की ओर निकल गए थे।

अमझर के पास चंचल को यूरिन में खून आ गया था

17 मई अप्रैल को रास्ते में अमझर के पास हथिनी को यूरिन में खून आ गया। इसके बाद उन्होंने वेटरनरी कालेज में डा. शोभा जावरे से मोबाइल पर बात की। उन्होंने हथिनी को तत्काल वापस जबलपुर लाने के लिए कहा। डा शोभा जावरे के अनुसार उन्होंने 18 मई से ही बीमार चंचल का उपचार शुरू कर दिया था। वो बीच में थोड़ा स्वस्थ भी हुई, लेकिन कुछ समय बाद उसकी किडनी में भी संक्रमण हो गया, उसने खाना-पीना छोड़ दिया।

बिगड़ती हालत को देख बाहर के अनेक एलीफेंट विशेषज्ञों से चर्चा

डा. शोभा जावरे ने उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए बाहर के अनेक एलीफेंट विशेषज्ञों से चर्चा की। असोम के डा. केेके शर्मा, डा. इंद्रमणि नायर, वीपी चन्पुरिया से भी उन्होंने चर्चा की, उनको वीडियो कालिंग के माध्यम से हथिनी को दिखाकर, उनसे सलाह भी ली। इसके बावजूद इन्फेंशन बहुत ज्यादा बढ़ जाने की वजह से उसके प्राणों की रक्षा नहीं की जा सकी। रविवार की रात करीब डेढ़ बजे उसकी मौत हो गई।

पीएम के बाद मौके पर ही दफनाया

वन विभाग की ओर से दिए गए पत्र के बाद वेटरनरी कालेज के डाक्टरों की टीम ने मृत हथिनी का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद सतपुला बाजार के पास राम मंदिर के पीछे उसे दफना भी दिया गया।

लोग पहुंचे पूजा-अर्चना करने

हथिनी की मौत का पता चलते ही बड़ी संख्या में में लोग वहां जुटने लगे, उन्होंने मृत हथिनी की पूजा-अर्चना भी की। उसके पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक लाेग वहीं डटे रहे।

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