कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। वे पहले की तरह उसी नंबर पर गैस बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें दूसरी एजेंसी के जरिए घर तक सिलेंडर की डिलीवरी मिलती रहेगी।
जिला प्रशासन की जांच में एजेंसी में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच के दौरान लगभग 2000 छोटे (5 किलो वाले) सिलेंडरों का रिकॉर्ड नहीं मिला, वहीं 40 भरे सिलेंडर स्टॉक में कम पाए गए। इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक सिलेंडरों की संख्या में भी बड़ा अंतर मिला।
यह भी सामने आया कि एजेंसी उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की होम डिलीवरी सही तरीके से नहीं कर रही थी और उनसे अतिरिक्त 35 रुपए वसूले जा रहे थे।
इन अनियमितताओं के आधार पर प्रशासन ने एजेंसी को नोटिस जारी किया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर एचपीसीएल को लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की गई। इसके बाद कंपनी ने कार्रवाई करते हुए एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और जांच पूरी होने तक गैस सप्लाई भी रोक दी है। एचपीसीएल के सीनियर एरिया सेल्स मैनेजर पुष्पेंद्र सोडा के अनुसार, जांच पूरी होने तक एजेंसी की सप्लाई बंद रहेगी, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है ताकि उन्हें समय पर गैस मिलती रहे। खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि जांच में कई अनियमितताएं मिली हैं। एजेंसी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है कि उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द क्यों न किया जाए। इसकी जानकारी एचपीसीएल को भी दे दी गई है।











