कच्चे तेल की कीमत में तेजी से सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। ईरान युद्ध के बाद से कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में पीएसयू और दूसरे माध्यमों से 78,438 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला था। इसमें तेल कंपनियों की करीब एक तिहाई हिस्सेदारी है। यह लगातार पांचवां साल था जब डिविडेंड कलेक्शन बजट अनुमान से बेहतर रहा था।
प्रॉफिट पर असर
फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि सीजफायर कभी भी टूट सकता है। अगर ऐसा होता है तो लड़ाई लंबी खिंच सकती है और इससे तेल तथा दूसरे कच्चे माल की कीमत में और तेजी आएगी। इससे पीएसयू के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर युद्ध जल्दी खत्म हो जाता है तो इससे पीएसयू के मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स 28 फरवरी को ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद 9 फीसदी उछल चुका है। यह इंडेक्स 29 आइटम्स की कीमतों पर नजर रखता है।अधिकारी ने कहा कि सरकार अभी 2026-27 का डिविडेंड टारगेट नहीं बदलना चाहती है क्योंकि ऐसा करना जल्दबाजी होगी। अगर लड़ाई जारी रहती है तो दूसरी छमाही में वह आंतरिक तौर इसकी समीक्षा कर सकती है। पिछले साल पेट्रोलियम कंपनियों ने सरकार को 25,798 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था। पावर सेक्टर की कंपनियों ने 13,213 करोड़ और कोयला कंपनियों ने 10,876 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था। पिछले साल सरकार को मिले कुल डिविडेंड में इन तीन सेक्टर्स की हिस्सेदारी 64 फीसदी थी।











