शर्मा ने आगे बताया कि इस सैंपल को पहले उत्तराखंड की लैब (रुद्रपुर) में जांच के लिए भेजा गया था। वहां जांच के नतीजे आए तो पता चला कि घी खाने की सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा है। यानी, यह घटिया क्वालिटी का था। उन्होंने यह भी बताया कि लैब रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि इस घी को खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है और लोग बीमार भी हो सकते हैं
दोबारा जांच में भी फेल हुआ घी
इसके बाद साल 2021 में पतंजलि कंपनी को इस बारे में नोटिस भेजा गया था। लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। फिर कंपनी के अधिकारियों ने खुद ही सैंपल की दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सैंपल को किसी सेंट्रल लैब में टेस्ट किया जाए। इसके लिए पतंजलि से 5000 रुपये की फीस भी ली गई थी।इसके बाद 16 अक्टूबर 2021 को अधिकारियों की एक टीम गाजियाबाद (यूपी) की नेशनल फूड लैब गई। वहां घी के सैंपल की दोबारा जांच की गई। 26 नवंबर 2021 को नेशनल फूड लैब ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में भी घी के सैंपल फूड सेफ्टी टेस्ट में फेल हो गए। इस रिपोर्ट को करीब दो महीने तक अच्छे से पढ़ा और समझा गया। इसके बाद, 17 फरवरी 2022 को यह मामला कोर्ट में पेश किया गया।











