इस पुनर्मिलन को पाकिस्तानी यूट्यूबर नासिर ढिल्लन ने अपने पंजाबी लहर प्रोजेक्ट के जरिए से संभव बनाया। जो कि दोनों देशों के बंटवारे में बंटे लोगों के परिवारों को जोड़ने का काम कर रहा है। पिछले साल ढिल्लों ने सकीना की अपने लंबे समय से खोए हुए भाई से भावनात्मक अपील का एक वीडियो अपलोड किया था। इसने लुधियाना के जस्सोवाल सूदन गांव के सरपंच जगतार सिंह का ध्यान खींचा। इन्होंने पुष्टि की कि गुरमेल सिंह उनके गांव में रहते थे।
बंटवारे की कहानी
यह कहानी बंटवारे के समय की है। जब सकीना की मां करमते बी का लुधियाना के नूरपुर गांव से अपहरण कर लिया गया था। जबकि उनका बाकी परिवार पाकिस्तान पहुंच गया था। बाद में दोनों सरकारें लापता परिवारों का पता लगाने और उन्हें फिर से मिलाने पर सहमत हुईं। सकीना के मुताबिक, पुलिस उसकी मां को वापस लाने के लिए उसके पिता को भारत ले गई, लेकिन पता चला कि उसने एक सिख से दोबारा शादी कर ली है। उसने आगे कहा कि जब वे उसे वापस ला रहे थे, तो मेरी मां ने कहा कि उसका बेटा गुरमेल (बदला हुआ नाम) खेलने के लिए बाहर गया था, लेकिन पुलिस एस्कॉर्ट ने उसे पीछे छोड़ दिया।
ऐसे ऑनलाइन हुई कहानी
दो साल बाद सकीना का जन्म हुआ। उसके पिता ने उसे यह कहानी बताई। उसने अपने भाई की तस्वीर और वह पत्र सुरक्षित रखा जो उसने अपनी मां को भेजा था। जो गांव के किसी व्यक्ति की ओर से लिखा गया था। पंजाबी लहर तक पहुंचने के बाद सकीना की कहानी रिकॉर्ड की गई और ऑनलाइन डाल दी गई।
यह कहानी बंटवारे के समय की है। जब सकीना की मां करमते बी का लुधियाना के नूरपुर गांव से अपहरण कर लिया गया था। जबकि उनका बाकी परिवार पाकिस्तान पहुंच गया था। बाद में दोनों सरकारें लापता परिवारों का पता लगाने और उन्हें फिर से मिलाने पर सहमत हुईं। सकीना के मुताबिक, पुलिस उसकी मां को वापस लाने के लिए उसके पिता को भारत ले गई, लेकिन पता चला कि उसने एक सिख से दोबारा शादी कर ली है। उसने आगे कहा कि जब वे उसे वापस ला रहे थे, तो मेरी मां ने कहा कि उसका बेटा गुरमेल (बदला हुआ नाम) खेलने के लिए बाहर गया था, लेकिन पुलिस एस्कॉर्ट ने उसे पीछे छोड़ दिया।
ऐसे ऑनलाइन हुई कहानी
दो साल बाद सकीना का जन्म हुआ। उसके पिता ने उसे यह कहानी बताई। उसने अपने भाई की तस्वीर और वह पत्र सुरक्षित रखा जो उसने अपनी मां को भेजा था। जो गांव के किसी व्यक्ति की ओर से लिखा गया था। पंजाबी लहर तक पहुंचने के बाद सकीना की कहानी रिकॉर्ड की गई और ऑनलाइन डाल दी गई।
रविवार शाम को जब भाई-बहन के मिलने का मौका आया तो गुरमेल अवाक रह गया। सकीना ने अपने भाई को कसकर गले लगा लिया। उसके चेहरे से खुशी के आंसू बह रहे थे। गुरमैल ने उम्र की समझदारी दिखाते हुए अपनी बहन को याद दिलाया कि यह खुशी मनाने और आनंदित होने का अवसर है। उनके पुनर्मिलन को दोनों परिवारों के मामूली साधनों के भीतर छोटे उपहारों के आदान-प्रदान से चिह्नित किया था।
बहन के लिए ले गए थे खास बिस्कुट
गुरमैल सोच-समझकर अपनी बहन के लिए अपने गांव में बने खास बिस्कुट लाए थे। बदले में सकीना ने गुरमेल को एक घड़ी और एक चांदी की राखी उपहार में दी। जो भाई-बहन के शाश्वत बंधन का प्रतीक है। सकीना अपनी बेटियों, बेटों, दामादों और उनके बच्चों सहित 16 सदस्यीय रिसेप्शन पार्टी के साथ गलियारे में पहुंची। नासिर ने कहा कि हमने सकीना के परिवार के लिए 400 रुपये का कॉरिडोर शुल्क अदा किया।











