सूत्रों के अनुसार, ONGC ने फरवरी में यह टेंडर जारी किया था और 20 मार्च को मुंबई में आयोजित प्री-बिड मीटिंग में देश-विदेश की करीब एक दर्जन ड्रिलिंग कंपनियों ने हिस्सा लिया। इस टेंडर में ड्रिलशिप और सेमी-सबमर्सिबल रिग्स दोनों शामिल हैं, जिन्हें अधिकतम पांच वर्षों के लिए किराए पर लिया जाएगा। ONGC ने रिग्स की तैनाती के लिए 80 दिनों की समयसीमा तय की है। यह समयसीमा बताती है कि कंपनी जल्दी से जल्दी इस काम को पूरा करना चाहती है।
समुद्र मंथन मिशन का हिस्सा
- यह कदम सरकार के 'समुद्र मंथन' मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाइड्रोकार्बन की खोज को तेज करना है।
- टेंडर के तहत ड्रिल जहाजों और सेमी-सबमर्सिबल रिग्स को 5 साल तक के लिए किराए पर लेने की योजना है।
- इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए ONGC अनुभवी ऑफशोर ड्रिलिंग कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर रही है, जिससे भारत में हाइड्रोकार्बन प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सके।











