ऐसे हुई शुरुआत
विजय संकेश्वर का परिवार प्रिटिंग प्रेस के बिजनेस में था, लेकिन उन्होंने ठाना कि वह कुछ और काम करेंगे। इसके लिए वह वह अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ गए। इसलिए संकेश्वर ने अपने बिजनस के लिए घरवालों से कोई आर्थिक मदद नहीं ली। उन्होंने अपने एक जानकार से पैसे उधार लिये और एक ट्रक खरीदा। उन्होंने साल 1976 में एक ट्रक से काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें बिजनेस स्थापित करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर किस्मत पलटी और 1994 तक उनके पास 150 ट्रक हो गए।
लॉजिस्टिक्स कारोबार का सगठित नहीं होना, संचार की कमी के बाद भी साल 1990 में वे कमर्शियल ट्रांसपोर्ट से पैसेंजर सर्विस में आ गए। इसके बाद विजय संकेश्वर ने विजयानंद ट्रैवल्स नाम से एक कंपनी की शुरुआत की, जिसका नाम बाद में बदलकर VRL Logistics रखा गया।
बन चुकी है कन्नड़ फिल्म
विजय संकेश्वर पर कन्नड़ भाषा में एक फिल्म भी बन चुकी है। इसे साल 2022 में रिलीज किया गया था। आज कंपनी का दावा है कि उससे ज्यादा कमर्शियल वाहन भारत में किसी और लॉजिस्टिक कंपनी के पास नहीं है। एक ट्रक से शुरू हुआ वीआरएल लॉजिस्टिक्स का सफर 4,816 कमर्शियल वाहनों तक पहुंच गया है। कमर्शियल वाहनों के इस रिकॉर्ड तोड़ काफिले के लिए कंपनी का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।











