यूनाइटेड नेशंस में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने गुरुवार को कहा है कि 'ईरान इस जलडमरूमध्य को बंद नहीं करने जा रहा है लेकिन इस शिपिंग मार्ग की सुरक्षा बनाए रखना ईरान का अधिकार है।' इरावानी ने कहा कि "हम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करने जा रहे हैं। लेकिन इस जलमार्ग में शांति और सुरक्षा बनाए रखना हमारा स्वाभाविक अधिकार है।"
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने रखी बड़ी शर्त
यूएन में ईरान के राजदूत इरवनी ने कहा कि 'ईरान समुद्री कानून के तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का पूरी तरह सम्मान करता है और उसके प्रति प्रतिबद्ध है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा स्थिति ईरान द्वारा अपने आत्मरक्षा के अधिकार के कानूनी इस्तेमाल का नतीजा नहीं है। बल्कि यह ईरान के खिलाफ आक्रामकता शुरू करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका की अस्थिर करने वाली कार्रवाइयों का सीधा परिणाम है।'इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने 'मेहर न्यूज एजेंसी' से कहा है कि ईरान नहीं चाहता कि यह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) असुरक्षित हो जाए। इस्माइल बगाई ने कहा कि "होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की सुरक्षा इस क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। फारस की खाड़ी और ओमान सागर पर सबसे लंबी तटरेखा होने के कारण ईरान ने हमेशा इस रणनीतिक जलमार्ग की रक्षा के लिए कीमत चुकाई है।'
होर्मुज की नाकेबंदी से दुनिया पर क्या असर?
आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% तेल और 20% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है। इसीलिए ये काफी अहम व्यापारिक मार्ग है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। आशंका जताई जा रही है कि अगर यह लंबे समय तक बंद रहा तो तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसके अलावा कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है और उसका सारा माल इसी रास्ते से निकलता है। इसके बंद होने से यूरोप और एशिया में स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी है।











