यह कदम कॉरपोरेट कर्मचारियों, प्रोफेशनल्स सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए महत्वपूर्ण है, जो गैर-सरकारी NPS प्रतिभागियों का बड़ा हिस्सा है। PFRDA की ऑफिशल नोटिफिकेशन के अनुसार, यह नई प्रणाली मौजूदा ढांचे से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है, जहां सबस्क्राइबर्स (अंशधारकों) को प्रत्येक स्तर पर एक ही निवेश विकल्प चुनने की अनुमति थी।
ज्यादा विकल्प
अब तक ज्यादातर सब्सक्राइबर्स सिर्फ टियर 1 और टियर 2 अकाउंट्स में इंवेस्ट कर सकते थे। टियर 1 में भी एक्टिव या ऑटो चॉइस जैसे सीमित विकल्प ही थे। अब MSF के तहत पेंशन फंड मैनेजर्स नई स्कीम डिजाइन कर पाएंगे। इनमें महिलाओं, यंग प्रोफेशनल्स और अलग-अलग उम्र के इन्वेस्टर्स के लिए खास प्रोडक्ट भी शामिल होंगे। सबसे बड़ा बदलाव 15 साल का न्यूनतम वेस्टिंग पीरियड है।पहले एनपीएस 60 साल की सुपरऐन्युएशन से जुड़ा था, लेकिन अब इन्वेस्टर 50 या 55 साल की उम्र में भी एग्जिट कर सकेंगे। चाहें तो वे 60 या 75 तक इन्वेस्ट जारी रख सकते हैं। रेगुलेटर ने इक्विटी अलोकेशन की 75% की लिमिट भी हटा दी है, अब 100% इक्विटी एक्सपोजर वाली स्कीम भी आ सकेंगी। इससे खासतौर पर यंग इन्वेस्टर्स को फायदा होगा, जिनके पास पहले से प्रोविडेंट फंड के जरिए फिक्स्ड इनकम होती है और वे एनपीएस पोर्टफोलियो में पूरी तरह इक्विटी लेना पसंद कर सकते हैं।
क्या कह रहे हैं जानकार?
HDFC पेंशन फंड के एमडी और सीईओ श्रीराम अय्यर ने कहा कि नया फ्रेमवर्क उम्र के हिसाब से स्कीम से 15 साल बाद एग्जिट का विकल्प या यंग इन्वेस्टर्स के लिए 100% इक्विटी एक्सपोजर शामिल है। इससे यह NPS रिटायरमेंट प्लानिंग करने वाले लोगों के लिए ज्यादा आकर्षक बनेगी। यह फ्रेमवर्क PFRDA एक्ट 2013 के तहत लाया गया है, जो एक पेंशन अकाउंट के तहत मल्टीपल स्कीम रखने की इजाजत देता है।जरूरी सेफगार्ड्स पहले जैसे ही रहेंगे। अकाउंट्स पोर्टेबल होंगे, एग्जिट के समय कॉर्पस का 40% हिस्सा एन्युटी में बदलना होगा, ताकि लाइफटाइम इनकम मिल सके और पेंशन फंड्स को प्रूडेंशियल इंवेस्ट नियमों का पालन करना होगा। जोखिम और रिटर्न की जानकारी भी ट्रांसपेरेंट तरीके से देनी होगी।











