नए सिस्टम के तहत, ये प्राइवेट ट्रस्ट EPFO द्वारा घोषित सालाना ब्याज दर से 2 प्रतिशत से ज्यादा अतिरिक्त ब्याज नहीं दे पाएंगे। अधिकारी ने बताया, यह फैसला पैसों की समझदारी बनाए रखने और बहुत ज्यादा रिटर्न देने से रोकने के लिए लिया गया है। दरअसल, यह देखा गया था कि कुछ ट्रस्ट तब 34% जैसा भारी-भरकम ब्याज देने लगते थे जब उनके सदस्यों की संख्या बहुत कम रह जाती थी।
ऑडिट में छूट
ऑडिट के मामले में अब EPFO केवल उन्हीं कंपनियों या ट्रस्ट की जांच करेगा जिनमें जोखिम ज्यादा होगा। या जो नियमों का पालन नहीं कर रहे होंगे। जो कंपनियां नियम मान रही हैं, उनका हर साल ऑडिट करना जरूरी नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंपनी किसी दूसरी कंपनी के साथ जुड़ती है या उसे खरीदती है (M&A), तो भी उसका EPFO के तहत 'छूट प्राप्त' दर्जा बरकरार रह सकेगा।एक सीनियर अधिकारी ने ET को बताया कि भारत में करीब 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां, PSUs और प्राइवेट संस्थान हैं जिन्हें EPFO से छूट मिली हुई है। ये कंपनियां EPF ऐक्ट 1952 की धारा 17 के तहत अपना PF ट्रस्ट खुद चलाती हैं। हालांकि, शर्त यह होती है कि उन्हें अपने कर्मचारियों को EPFO की स्कीम के बराबर या उससे बेहतर फायदे देने होते हैं।
प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट को छूट
- करीब 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियों को EPFO से छूट मिली हुई है
- ये कंपनियां EPF ऐक्ट 1952 के तहत अपना PF ट्रस्ट खुद चलाती हैं
- उन्हें अपने मेंबर्स को EPFO के बराबर या उससे बेहतर फायदे देने होते हैं
- ये ट्रस्ट अपने मेंबर्स को EPFO की दर से 2% से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकेंगे
- कुछ ट्रस्ट मेंबर्स की संख्या घटने पर 34% तक भारी-भरकम ब्याज देते हैं











