अब यूरोप और अमेरिका में भी दिखेंगी मारुति और टाटा की कारें 5 पॉइंट्स में समझिए क्या है Bharat NCAP

अब यूरोप और अमेरिका में भी दिखेंगी मारुति और टाटा की कारें 5 पॉइंट्स में समझिए क्या है Bharat NCAP
नई दिल्ली: केंद्र सरकार आज भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) लॉन्च करने जा रही है। इसका मकसद 3.5 टन वजन वाली गाड़ियों के सुरक्षा मानकों को बढ़ाकर सड़क सुरक्षा में सुधार करना है। इस कार्यक्रम के तहत, कार मैन्युफैक्चरर अपनी मर्जी से अपनी गाड़ियों को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 197 के मुताबिक टेस्ट के लिए पेश कर सकते हैं। टेस्ट में प्रदर्शन के हिसाब गाड़ियों को स्टार रेटिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मकसद कार ग्राहकों को बाजार में मौजूद मोटर गाड़ियों की दुर्घटना सुरक्षा का तुलनात्मक आकलन करने के लिए एक टूल मुहैया कराना है। इससे देश में सुरक्षा के प्रति संवेदनशील कार बाजार विकसित होने के साथ-साथ घरेलू कार मैन्युफैक्चरर की एक्सपोर्ट क्षमता भी बढ़ेगी।

सरकार की ओर से आए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संभावित कार ग्राहक अलग-अलग गाड़ियों के सुरक्षा मानकों की तुलना करने के लिए इन स्टार रेटिंग की मदद ले सकते हैं और उसी हिसाब से गाड़ी खरीदने का फैसला कर सकते हैं। सुरक्षित कारों की मांग बढ़ने के साथ, कार मैन्युफैक्चरर को ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उम्मीद है कि भारतीय कारें ग्लोबल बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगी क्योंकि वे भविष्य में उच्च सुरक्षा मानकों का पालन करेंगी।

कैसे मिलेगी रेटिंग

भारत एनसीएपी सेफ्टी एसेसमेंट इनिशिएटिव है। इसका मकसद पैसेंजर गाड़ियों की सेफ्टी परफॉरमेंस का आकलन करना है। इसमें भारत के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और लेटिन अमेरिका के मुताबिक डिजाइन किया गया है। क्रैश टेस्ट और पॉइंट बेस्ड इवेल्यूएशन के आधार पर गाड़ियों को स्टार रेटिंग्स दी जाएगी। सबसे सुरक्षित गाड़ी को फाइव स्टार दिए जाएंगे। गाड़ियों की सेफ्टी रेटिंग के लिए कई क्रैश टेस्ट किए जाएंगे। इनमें फ्रंटल, साइड और पोल-साइड इम्पैक्ट टेस्ट शामिल हैं। फ्रंटल क्रैश टेस्ट 64 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर कंडक्ट किया जाता है। इसी तरह साइड टेस्ट 50 किमी और पोल-साइड टेस्ट 29 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर किया जाता है।

भारत एनसीएपी अनिवार्य नहीं है। विकसित देशों में भी इस तरह के प्रोग्राम वॉलंटरी होते हैं। एनसीएपी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कार बनाने वाली कंपनियां बेसिक सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से ऊपर उठकर एडवांस सेफ्टी फीचर अपनाएं। अब तक भारतीय कार कंपनियों के अपनी कारों को ग्लोबल न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम के तहत टेस्ट कराना पड़ता था। यह काफी लंबी और खर्चीली प्रोसेस है।

क्या है Bharat NCAP, पांच पॉइंट्स में समझिए...

  1. कारों को टेस्ट में उनकी परफॉरमेंस के आधार पर एडल्ट ऑक्यूपेंट्स और चाइल्ड ऑक्युपेंट्स के लिए स्टार रेटिंग्स दी जाएगी।
  2. अगर आप कार खरीदने जा रहे हैं तो अलग-अलगा गाड़ियों के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स की तुलना के लिए स्टार रेटिंग्स का सहारा ले सकते हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टोयोटा ने भारत एनसीएपी को सरकार का साहसिक कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को काफी मदद मिलेगी।
  3. माना जा रहा है कि ज्यादा सुरक्षित कारों की मांग बढ़ेगी। इससे कार बनाने वाली कंपनियां कस्टमर की जरूरत के मुताबिक कार बनाएंगी। सेफ्टी स्टैंडर्ड्स बढ़ने से भारतीय कारें ग्लोबल मार्केट में कंपीट कर पाएंगी और देश से कारों के निर्यात की संभावना बढ़ेगी।
  4. जून में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार सड़कों पर ब्लैक स्पॉट्स हटाने के लिए 40,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा था कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश से रोजगार भी पैदा होते हैं।
  5. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2021 में देश में सड़क हादसों में 1.54 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 3.84 लाख लोग घायल हुए। 2020 में 1.31 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए थे और 3.49 लाख घायल हुए थे।
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