मोहम्मद यूनुस के राज में तुर्की और बांग्लादेश के बीच रिश्ते काफी मजबूत हुए और जमात-ए-इस्लामी ने अपना काफी प्रभाव बढ़ा लिया। अब तुर्की के खलीफा एर्दोगन चाहते हैं कि तारिक रहमान के राज में भी इस रिश्ते को बरकरार रखा जाए। तुर्की के अखबार डेली सबाह की रिपोर्ट के मुताबिक फिदान चाहते हैं कि बांग्लादेश के साथ आर्थिक, व्यापारिक, रक्षा उद्योग सहयोग, ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत किया जाए। तुर्की चाहता है कि बांग्लादेश के साथ व्यापार दो अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
बांग्लादेश से क्या चाहता है खलीफा एर्दोगन का तुर्की?
तुर्की चाहता है कि बांग्लादेश बहुपक्षीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी और डी-8 में सहयोग करे। डी-8 में पाकिस्तान की भी बड़ी भूमिका है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में खाड़ी में चल रहे युद्ध पर खासतौर पर चर्चा होगी। इसके अलावा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी जंग पर भी बातचीत होगी। दोनों एक-दूसरे को अपना आकलन देंगे। खलीफा बनने का सपना देख रहा तुर्की दक्षिण एशिया में अपनी भूमिका को बढ़ाना चाहता है और इसी वजह से वह पाकिस्तान, मालदीव और बांग्लादेश को किलर ड्रोन और अन्य हथियार दे रहा है।
बांग्लादेश में एक्टिव हुए तुर्की और पाकिस्तान
इससे पहले मोहम्मद यूनुस ने डी-8 सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति एर्दोगन से मिस्र में मुलाकात की थी। इसके बाद बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने अप्रैल 2025 में तुर्की की यात्रा की थी। तुर्की पाकिस्तान और बांग्लादेश को और करीब लाने की कोशिश कर रहा है। तारिक रहमान सरकार ने पाकिस्तान से उतनी गर्मजोशी नहीं दिखाई है जितनी की यूनुस ने दिखाई थी। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में रोहिंग्या विद्रोहियों की सेना तैयार करने में मदद कर रही है ताकि म्यांमार में कार्रवाई की जा सके। हाल ही में बांग्लादेश ने तुर्की के हथियारों का खुलकर प्रदर्शन भी किया है। तुर्की की कंपनियां अब बांग्लादेश में हथियार बनाने के लिए तैयार हैं। अभी हाल ही में चीन के दूत ने भी खलीलुर रहमान से मुलाकात की है।











