दरअसल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड ने हाल ही में वायु प्रदूषण करने वाले होटलों के बाहर चल रहीं तंदूर-भट्टी के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम ने शहर में मुहिम चलाकर तंदूर-भट्टी के उपयोग को रोकने के लिए जुर्माने लगाए और भट्टियां जप्त की। इस कार्रवाई के बाद नवंबर में दोबारा मुहिम चलाते हुए जहां तंदूर-भट्टी मिले, उन दुकानों को सील कर होटल का लायसेंस निरस्त कर दिया। लगातार कार्रवाई के बाद अशोका गार्डन 80 फिट रोड स्थित संचालित सभी होटल धूआं मुक्त हो गए हैं। इधर नानवेज रेस्टोरेंट संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसकी सूचना देते हुए लिखित में भरोसा दिलाया कि अब कभी तंदूर-भट्टी का उपयोग नहीं करेंगे। निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने अशोका गार्डन के पहले 22 होटल संचालकों को नोटिस भेजे। इनमें से पांच होटल पहले ही बंद हो गए थे। अब दो होटल ओर बंद हो गए हैं। वहीं 80 फीट रोड पर 22 मार्च तक सभी नानवेज होटलों को बंद करना होगा।
एनजीटी का आदेश, अशोका गार्डन 80 फीट रोड पर 22 मार्च तक सभी नानवेज रेस्टारेंट बंद होंगे
भोपाल। एनजीटी ने बीते कुछ दिनों पहले अशोका गार्डन 80 फीट रोड पर संचालित नानवेज रेस्टारेंट की जांच के लिए नगर निगम को निर्देश दिए थे। जिसके बाद निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने यहां संचालित नानवेज होटल और रेस्टोरेंट को नोटिस जारी किया था। निगम द्वारा 24 जनवरी को जारी किए गए नोटिस में 15 दिन के दौरान बिल्डिंग परमिशन से संबंधित कागजात प्रस्तुत करना थे। अधिकांश ने कागजात जमा कर दिए हैं। लेकिन निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के अधिकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए ज्यादातर होटल ही बंद हो गए।











