चांद पर जा रही नासा की टीम में अमेरिकी नागरिक रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के साथ-साथ कनाडाई नागरिक जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह टीम 10 दिनों के मिशन पर निकलेगी और चंद्रमा पर उतरे बिना पृथ्वी के इस उपग्रह का चक्कर लगाएगी। वह ठीक वैसे ही होगा, जैसा 1968 में अपोलो-8 ने किया था।
आर्टेमिस-II मिशन की अहमियत
आर्टेमिस-II मिशन इसलिए अहम है क्योंकि अपोलो युग के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में और गहराई तक सफर करेंगे और चांद का चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे। क्रू जब चांद के दूसरी तरफ पहुंचेगा तो पृथ्वी से 4,50,000 किमी दूर होगा। ऐसे में वह इतिहास में सबसे ज्यादा दूरी तय करने वाले इंसान बन जाएंगे। वे 50 साल पहले बने दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे।आर्टेमिस-II कोई लैंडिंग मिशन नहीं है। इसके बजाय यह इंसानों को साथ लेकर की जाने वाली एक बहुत ही सोच-समझकर डिजाइन की गई टेस्ट फ्लाइट है। इसका मकसद यह साबित करना है कि NASA के नए रॉकेट, अंतरिक्ष यान और गहरे अंतरिक्ष के सिस्टम भविष्य में चांद पर उतरने वाले मिशनों और फिर मंगल ग्रह पर जाने वाले मिशनों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
बार-बार हुई मिशन में देरी
आर्टेमिस-II इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार किसी अश्वेत व्यक्ति, पहली महिला और पहले गैर-अमेरिकी को चंद्रमा के मिशन पर भेजा जा रहा है। यह NASA के नए चंद्र रॉकेट की पहली मानव-युक्त उड़ान है, जिसे SLS नाम दिया गया है। मिशन का लक्ष्य एक स्थायी बेस स्थापित करना है, जो आगे की खोज के लिए एक मंच प्रदान करेगा।नासा का यह मिशन मूल रूप से फरवरी में उड़ान भरने वाला था। बार-बार आई रुकावटों के कारण मिशन में देरी हुई। यहां तक कि रॉकेट को विश्लेषण और मरम्मत के लिए वापस उसके हैंगर में ले जाना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार का लॉन्च रद्द होता है तो 6 अप्रैल तक उड़ान भरने के और भी अवसर उपलब्ध हैं।











