आप बहुत याद आ रहे है *टी एन शेषन साहब (पूर्व चुनाव आयुक्त)*

आप बहुत याद आ रहे है *टी एन शेषन साहब (पूर्व चुनाव आयुक्त)*
माननीय आपके समय बड़ी-बड़ी विशाल रेलिया बड़े-बड़े पोस्टर विज्ञापन और नगद या समान बांटना तो बहुत दूर की बात थी उम्मीदवार अपना झंडा लगवाने पर भी विचार करता था। *उस वक्त फिजूल खर्ची नहीं होती थी और इसी कारण चुनाव के समथ किसी से भी कोई वसूली नहीं होती थी* लेकिन आज का दौर सबसे खतरनाक दौर है यहां *आज चुनाव लड़ने के लिए लाखों नहीं करोड़ों रुपए की आवश्यकता होती है।* बड़ी-बड़ी विशाल रैलिया जनसभा लगातार होने वाले बड़े-बड़े विज्ञापन जिसमें कई विज्ञापन बड़े महंगे होते हैं। अब दारु शराब के दौर के बजाय नगद रुपया साड़ी स्कूटर गाड़ी और भी क्या क्या बाटा जाता है यही नहीं सभी सत्ताधारी पार्टी तो और दो कदम आगे हैं सबको बहन भाई भांजे भांजे बेरोजगार सब चुनाव के समय याद आ रहे हैं खूब दिल खोलकर पैसा खाद्यान्न और सामान बाट रहे हैं जैसे कि हम सबसे अमीर प्रांत के मालिक हैं। भगवान जाने यह चुनाव जीते या ना जीते परंतु *आने वाले समय में इन सब खर्चो का भार जनता को ही उठाना पड़ेगा।* 
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)
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