भोपाल। महिला सशक्तीकरण के कई आयाम हो सकते हैं। उनके जीवन स्तर में सुधार भी सशक्तीकरण है। आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वे गैस चूल्हे पर खाना पकाएंगी। यह केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच का ही परिणाम है कि उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के बारे में सोचा ही नहीं, उसे करके भी दिखाया। उज्ज्वला योजना की लाभार्थी ग्रामीण महिलाएं जब गैस चूल्हे पर खाना बनाती हैं तो उनके चेहरे पर अलग मुस्कुराहट नजर आती है।
प्रधानमंत्री की इसी सोच का नतीजा है कि महिलाएं आज अपनी चौखट से बाहर निकली हैं। बिना बैसाखी के हर क्षेत्र में शिखर पर चढ़ रही हैं। पुरुष अपनी सोच बदलेंगे तो महिलाओं के प्रति उनका नजरिया भी बदलेगा और वे उन्हें सम्मान दे पाएंगे। यह बात मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने 'नईदुनिया' से कही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नईदुनिया के राज्य ब्यूरो प्रमुख धनंजय प्रताप सिंह से उन्होंने विभिन्न विषयों पर बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-
प्रश्न - क्या राजनीति में महिलाओं की भागीदारी से आप संतुष्ट हैं या इसे और बढ़ना चाहिए।
भूरिया - राजनीति में अब महिलाएं बराबरी नहीं बल्कि पुरुषों से आगे निकल रही हैं। मध्य प्रदेश में ही देख लीजिए, पंचायत और नगरीय निकाय में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण है और महिलाएं इससे कहीं ज्यादा संख्या में जीती हैं। निचले स्तर से जो महिला प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है, आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा। भाजपा ने तो संगठन में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत स्थान दिया है। टिकटों में भी भागीदारी बढ़ाई जा रही है, इसके अच्छे परिणाम आएंगे।
प्रश्न - केंद्रीय योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। इससे क्या बदलाव आया है।
भूरिया - स्वतंत्रता के बाद से अब तक हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही एकमात्र ऐसे राजनेता हैं, जिन्होंने महिलाओं की परेशानियों को जाना और उन्हें सशक्त बनाने के बारे में प्रयास किए। उज्ज्वला से लेकर मातृ वंदना योजना महिलाओं के जीवन स्तर में बदलाव ला रही हैं। जो विशिष्ट पिछड़ी जनजातियां हैं, पीएम उन्हें भी समाज की मुख्यधारा में लाना चाह रहे हैं। महिलाओं को पक्के मकान दिए जा रहे हैं, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। योजनाओं का लाभ लेने में पुरुषों से आगे महिलाएं हैं।
प्रश्न - महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को कैसे रोका जा सकता है।
भूरिया - महिला सुरक्षा और सम्मान बेहद संवदेनशील विषय है। समाज में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव लाया जाना चाहिए। जब महिला बराबरी के साथ नौकरी करके परिवार का भरण-पोषण कर रही है, तो उसे भी वही सम्मान मिलना चाहिए, जो एक पुरुष को मिलता है।











