एमएलसी ने विधान परिषद के सभापति के समक्ष झूठी रिपोर्ट पर करने वाले इंजीनियरों पर कार्रवाई की मांग की है। एमएलसी ने बताया कि भिखारीपुर में बनी बिल्डिंग का नक्शा पास नहीं कराया गया है। उन्होंने विधान परिषद के प्रमुख सचिव को नियम 110 के तहत इसकी सूचना दी थी। विधान परिषद की ओर से पावर कॉरपोरेशन से संबंध में जवाब मांगा गया। इस पर पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार से जवाब मांगा। एमडी ने निदेशक तकनीकी राजेंद्र प्रसाद को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता ने मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट दी।
विधान पार्षद ने इस रिपोर्ट को झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि भवन का नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं है। एमएलसी ने कहा कि एक्सईएन ने जुलाई में वाराणसी डेवलपमेंट अथॉरिटी में भवन का नक्शा पास कराने के लिए आवेदन दिया है। वीडीए ने भवन से संबंधित कई कागजात और प्रोसेसिंग फीस मांगी। एसडीओ ने एक्सईएन को इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी भी दी। एमएलसी ने एसडीओ का पत्र सदन में पेश किया। उनका कहना था कि पहले दी गई सूचना में बताया गया कि नक्शे की जरूरत नहीं है। फिर आवेदन क्यों किया गया?
ज्ञानवापी का मुद्दा वाराणसी में लगातार गरमाया हुआ है। कोर्ट में कई मामले चल रहे हैं। सिविल जज सीनियर डिवीजन शिखा यादव की कोर्ट में शुक्रवार को ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित दाखिल किए गए प्रतिनिधि वाद पर सुनवाई हुई। कोर्ट में मौजूद अंजुमन इंतजामिया मसाजि कमिटी ने आपत्ति दाखिल करने के लिए याचिका की कॉपी मांगी। साथ ही, श्रीकाशी विश्वनाथ नेमी भक्त मंडल ने पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दिया। संजय कुमार रस्तोगी, नवीन कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह और अखंड प्रताप सिंह ने प्रतिनिधि वाद दायर किया है। इसमें अंजुमन इंतजामिया मसाजिद और श्रीकाशी विश्वनाथ ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। वाद में मांग की गई है कि लोहे की बैरिकेडिंग से घिरे आराजी संख्या- 9130 (ज्ञानवापी) में स्थित मां श्रृंगार गौरी, आदि विश्वेश्वर सहित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष देवी देवताओं के नित्य दर्शन, पूजन, राजभोग में प्रतिवादी की ओर से कोई अवरोध न उत्पन्न किया जाए। साथ ही, मांग की गई है कि सनातनियों को वहां जाने से कोई रोक-टोक नहीं किया जाए।
ज्ञानवापी केस में प्रतिनिधि वाद दायर
ज्ञानवापी का मुद्दा वाराणसी में लगातार गरमाया हुआ है। कोर्ट में कई मामले चल रहे हैं। सिविल जज सीनियर डिवीजन शिखा यादव की कोर्ट में शुक्रवार को ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित दाखिल किए गए प्रतिनिधि वाद पर सुनवाई हुई। कोर्ट में मौजूद अंजुमन इंतजामिया मसाजि कमिटी ने आपत्ति दाखिल करने के लिए याचिका की कॉपी मांगी। साथ ही, श्रीकाशी विश्वनाथ नेमी भक्त मंडल ने पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दिया। संजय कुमार रस्तोगी, नवीन कुमार सिंह, अजीत कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह और अखंड प्रताप सिंह ने प्रतिनिधि वाद दायर किया है। इसमें अंजुमन इंतजामिया मसाजिद और श्रीकाशी विश्वनाथ ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। वाद में मांग की गई है कि लोहे की बैरिकेडिंग से घिरे आराजी संख्या- 9130 (ज्ञानवापी) में स्थित मां श्रृंगार गौरी, आदि विश्वेश्वर सहित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष देवी देवताओं के नित्य दर्शन, पूजन, राजभोग में प्रतिवादी की ओर से कोई अवरोध न उत्पन्न किया जाए। साथ ही, मांग की गई है कि सनातनियों को वहां जाने से कोई रोक-टोक नहीं किया जाए।
उर्स की मांग पर सुनवाई टली
वाराणसी कोर्ट में उर्स की मांग वाली याचिका पर सुनवाई टल गई है। दरअसल, पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने से शुक्रवार को ज्ञानवापी परिसर में चादरपोशी और उर्स की मांग करने वाले प्रार्थना पत्र पर सिविल सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। वादी मुख्तार अंसारी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई है कि कई सुनवाई के बाद भी प्रतिवादी की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया। उनका अवसर समाप्त कर कोर्ट कार्यवाही को उन्होंने आगे बढ़ाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। लोहता निवासी मुख्तार अहमद समेत चार मुस्लिमों ने ज्ञानवापी स्थित मजार पर उर्स की मांग की है।
राखी सिंह की याचिका पर 17 को सुनवाई
वाराणसी में नई इकाइयों को नहीं मिल रहे बिजली कनेक्शन
सीएम योगी आदित्यनाथ नई औद्योगिक इकाइयों और निवेश के जरिए यूपी की इकॉनमी को वन ट्रिलियन की बनाने की बात कर रहे हैं। वहीं, अधिकारियों की ओर से नई इकाइयों को बिजली कनेक्शन देने में पेंच फंसाया जा रहा है। वाराणसी में औद्योगिक इकाइयों को बिजली कनेक्शन देने के मामले में तेजी से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बनारस में दर्जन भर नई इकाइयां 6 माह से इसलिए शुरू नहीं हो पाई हैं कि उन्हें बिजली कनेक्शन ही नहीं मिला है। पुरानी इकाइयों को भी विभागीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इन इकाइयों के अलावा 30 से ज्यादा उद्यमियों ने लोड बढ़ाने का आवेदन किया है। यह साल भर से लंबित है। फैक्ट्री शुरू न होने से नए उद्योगों को बैंक में लाखों रुपए ब्याज भरना पड़ रहा है। रख-रखाव पर खर्च अलग हो रहा है। कुल मिलाकर उन पर दोहरी मार पड़ रही है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में नए विद्युत सब स्टेशन की जरूरत बताई है।











