हमने बादलपुर में कुछ गांव वालों से इस मुद्दे पर बातचीत की। अधिकतर गांव वालों ने मायावती के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा- 'मायावती हमारे गांव की बेटी हैं, बहन हैं। वह जो भी फैसला करेंगी हम और हमारा पूरा गांव उनके साथ है। क्या आपकी गांव की बेटी मायावती का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला उचित है? इस पर ग्रामीण करतार सिंह नागर ने कहा- 'मायावती दलितों की एक मात्र बड़ी लीडर हैं। उनका दलित वोट हमेशा उनके साथ है। चाहे वो अकेले चुनाव लड़ें या किसी दल के साथ मिलकर। हमारा वोट केवल और केवल मायावती को ही जायेगा।' करतार सिंह नागर का कहना है कि इसकी दूसरी वजह यह भी है कि मायावती के कार्यकाल में जनपद गौतमबुद्ध नगर और यूपी का खूब विकास हुआ है। हमारे गांव का विकास सिर्फ बसपा शासनकाल में हुआ। इसीलिए मायावती जो भी फैसला करेंगी, पूरा गांव उनका समर्थन करेगा।
हमारे गांव में सीवर लाइन, अस्पताल सबकुछ है: सोनू नागर
सोनू नागर और कुछ अन्य लोगों का कहना है कि अब बसपा में मायावती के साथ-साथ उनके भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद भी जुड़ गए हैं। आकाश आनंद एक युवा नेता के तौर पर उभर कर सामने आएंगे और बसपा पार्टी को बतौर युवा नेता नई सोच के तौर पर आगे बढ़ाएंगे। सोनू नागर ने बताया कि मायावती ने गौतमबुद्ध नगर के लिए बहुत काम किए हैं। उन्होंने गौतमबुद्ध नगर यूनिवर्सिटी, बालिका इंटर कॉलेज, बालक इंटर कॉलेज और महामाया बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण करवाया। कांशीराम अस्पताल बनाया जिसका नाम अब जिम्स अस्पताल कर दिया गया है। बादलपुर गांव में 2 अस्पताल बनाए। मंगल साइंस चिकित्सालय बहन जी के दादा के नाम पर बनाया गया। इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पोलिटेकनिकल कॉलेज, आईटीआई कॉलेज और घूमने के लिए दो बड़े स्तर पर पार्क बनाए हैं। मायावती शासन में बादलपुर थाना बनाया गया है। हमारे पूरे गांव में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट), आरसीसी रोड, सीवर लाइन, वाटर लाइन के साथ सभी मूलभूत सुविधाएं है। लाइट की बात करें तो जब बहन जी की सरकार थी तो 24 घंटै बिजली आती थी। अब 18 घंटे आती है।'बहन जी के कामों का नाम बदल दे रही मौजूदा सरकार'
गांव वालों ने कहा- 'बहन जी के सरकार में ही जो विकास हुआ है उन्ही के सरकार में हुआ है। उसके बाद कोई काम नहीं किया है। मौजूदा सरकार में उनके कामों के नाम बदलकर मेन्टेन का काम कर रहे है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को तेजी देने का काम भी बसपा सरकार ने ही दिया था। इसके बाद तो नाम मात्र के लिए विकास हो रहा है। हमें नही लगता कि पिछले 6 सालों में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को छोड़कर ग्रेटर नोएडा में कोई दूसरा प्रोजेक्ट मौजूदा सरकार लाई हो।'2007 विधानसभा चुनाव में बसपा को स्पष्ट बहुमत
आपको बता दें कि वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को स्पष्ट बहुमत मिला था। मायावती अकेले अपनी पार्टी के बलबूते पर चौथी बार उत्तर प्रदेश राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन इसके बाद से ही मायावती का राजनीतिक ग्राफ लगातार घटने लगा। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा 403 विधासभा सीटों में से केवल एक सीट निकाल पाई। पार्टी का वोट शेयर 12.8 प्रतिशत रहा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा 19 सीटें जीती थी। वोट शेयर 22 प्रतिशत था।सपा के साथ मिलकर लड़ा था 2019 लोकसभा चुनाव
अगर बात लोकसभा चुनाव की करें तो 2019 का चुनाव बसपा ने सपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। इस गठबंधन में बसपा को 10 सीटें और सपा को पांच सीटें मिली थीं। इस चुनाव के बाद सपा और बसपा का गठबंधन टूट गया। अखिलेश यादव ने कहा था कि हमारा वोट तो बहन जी को गया, लेकिन इसमें हमारा नुकसान हो गया। वहीं, मायावती ने भी चुनाव के बाद दिए गए बयान में कहा कि सपा के साथ जाकर उन्हें चुनाव में नुकसान हुआ। एक अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 65 उपजातियां दलितों में हैं। इनमें सबसे बड़ी आबादी जाटव समुदाय की है। कुल दलित आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा जाटव हैं। मायावती खुद इसी समुदाय से आती हैं।











