भारतीय कंपनियों ने भी इस मौके का फायदा उठाया है। शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप को 3.4 अरब डॉलर का प्राइवेट क्रेडिट डील मिला है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 2.98 अरब डॉलर का लोन लिया है। इससे पता चलता है कि दुनिया भर के निवेशक भारत के कॉर्पोरेट कर्ज में रुचि दिखा रहे हैं।
क्या हैं कारण?
ब्लूमबर्ग की एक खबर के अनुसार इस उत्साह के पीछे कई कारण हैं। भारत में सरकार देश को ग्लोबल सप्लाई चेन में और गहराई से जोड़ना चाहती है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की उदार नीति भी बाजार को सपोर्ट कर रही है। बॉन्ड यील्ड तीन साल के सबसे निचले स्तर पर है।क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
हांगकांग में Natixis के सीनियर इकोनॉमिस्ट त्रिन्ह गुयेन ने कहा, अगर भारत सही तरीके से काम करे तो वह ट्रंप 2.0 में बड़ा विजेता बन सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत बॉन्ड में अच्छा रिटर्न और इक्विटी निवेशकों के लिए भी अच्छा मुनाफा दे सकता है।ग्लोबल फंड मैनेजरों का नजरिया तेजी से बदला है। फ्रैंकलिन टेम्पलटन और फेडरेटेड हरमेस जैसे फंड भी भारत में निवेश करने को उत्सुक हैं। BofA सिक्योरिटीज के एक सर्वे के अनुसार एशियाई फंड मैनेजरों के लिए भारतीय शेयर सबसे पसंदीदा बन गए हैं।











