मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेजी आई। भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे ब्रेंट क्रूड 3.50% की तेजी के साथ 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) में भी 4% की तेजी थी। इस तेजी के साथ यह प्रति बैरल 97.22 डॉलर पर था। ईरान युद्ध को आज 18वां दिन है। इस युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर था। इन 18 दिनों में इसमें 44% की वृद्धि हुई है
शेयर बाजार में बड़ी तबाही आनी बाकी, ब्रोकरेज फर्म ने दी चेतावनी, कच्चे तेल की कीमत से सीधा कनेक्शन
नई दिल्ली: ईरान-इजरायल/अमेरिका युद्ध के कारण पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव पैदा हो गया है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के जहाजों का आना काफी मुश्किल हो रहा है। इस युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 100 डॉलर पार हो गई है। ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल (Emkay Global) के मुताबिक अगर तेल की कीमतों में सुधार नहीं हुआ तो भारतीय शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट आ सकती है।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेजी आई। भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे ब्रेंट क्रूड 3.50% की तेजी के साथ 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) में भी 4% की तेजी थी। इस तेजी के साथ यह प्रति बैरल 97.22 डॉलर पर था। ईरान युद्ध को आज 18वां दिन है। इस युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर था। इन 18 दिनों में इसमें 44% की वृद्धि हुई है
ब्रोकरेज फर्म के आकलन से पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत हर महीने करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहने से चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 9 से 10 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकता है। इससे मुद्रास्फीति करीब 50 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकती है। ओएमसी के पीएटी में 9 फीसदी की गिरावट आ सकती है।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेजी आई। भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे ब्रेंट क्रूड 3.50% की तेजी के साथ 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) में भी 4% की तेजी थी। इस तेजी के साथ यह प्रति बैरल 97.22 डॉलर पर था। ईरान युद्ध को आज 18वां दिन है। इस युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर था। इन 18 दिनों में इसमें 44% की वृद्धि हुई है











