क्या चाहते हैं सिल्वर जुलरी मैन्यूफैक्चर्स
मामले की जानकारी रखने वाले एक बैंक अधिकारी ने बताया कि चांदी के बढ़ते एक्सपोर्ट के बीच जुलरी मैन्यूफैक्चर्स बैंकों से चांदी की खरीद, चांदी के प्रोडक्ट और जुलरी मैन्यूफैक्चरिंग के लिए लोन बढ़ाने को कह रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले महीने एक बैठक में इस मुद्दे को आरबीआई के सामने उठाना तय हुआ था।' अधिकारी ने कहा कि सिल्वर एक्सपोर्ट करीब 25000 करोड़ रुपये के स्तर को टच कर गया है और इस सेक्टर में लोन की भारी डिमांड है।गोल्ड जुलरी मैन्यूफैक्चर्स को मिल रहा फायदा
मौजूदा रेगुलेशंस के तहत नोमिनेटेड बैंक्स सोने का आयात करने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, 2015 (GMS) में भाग लेने वाले नामित बैंक जुलरी एक्सपोर्टर्स या गोल्ड जुलरी के घरेलू मैन्यूफैक्चर्स को बढ़ा हुआ गोल्ड लोन प्रदान कर सकते हैं।चांदी में भी GML जैसा हो फ्रेमवर्क
एक दूसरे बैंक अधिकारी ने कहा कि सिल्वर जुलरी मैन्यूफैक्चरिंग में ऑपरेशनल सायकल के दौरान गोल्ड जुलरी के समान ही कीमत और ऑपरेशनल जोखिम होते हैं। उन्होंने कहा, 'इस सेगमेंट में करीब 14-15% सालाना की वृद्धि हो रही है। अगर हमारे पार जीएमएल के समान फ्रेमवर्क होगा, तो यह काफी अच्छा रहेगा।'











