​घर छोड़ा, 18 की सैलरी पर सालों तक जूठे बर्तन धोए... नौकर से ऐसे बने 300 करोड़ के 'सागर रत्ना' के मालिक

​घर छोड़ा, 18 की सैलरी पर सालों तक जूठे बर्तन धोए... नौकर से ऐसे बने 300 करोड़ के 'सागर रत्ना' के मालिक
नई दिल्ली: अगर इंसान दिल से किसी चीज के लिए कोशिश करें तो वो उसे निश्चित तौर पर मिलती है। अगर हिम्मत और मेहनत के साथ अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश की जाए तो सफलता मिलनी तो तय है। ऐसी ही एक कहानी हम आपको सुना रहे हैं। आपने भी कई बार सागर रत्ना (Sagar Ratna) में इडली-डोसा खाया होगा, लेकिन इस सागर रत्ना को खड़ा करने वाले जयराम बानन (Jayaram Banan Success Story) के संघर्ष केबारे में नहीं जानते होंगे। आज देश के साथ-साथ गुनिया के कई दूसरे देशों में सागर रत्ना रेस्टोरेंट हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके मालिक जयराम कभी सिर्फ 18 रुपये की सैलरी पर होटल में बर्तन मांजने का काम करते थे।

​होटल में धोएं जूठे बर्तन​

जयराम बानन की कहानी संघर्ष से भरी है। सागर रत्ना को खड़ा करने में उन्होंने अपनी खून-पसीना एक कर दिया। कोई सोच भी नहीं सकता था कि जो आज होटल में टेबल साफ कर रहा है, जूठे प्लेट धो रहा है वो कभी करोड़ों की कंपनी चलाएगा। आज देश में उके 100 से ज्यादा आउटलेट्स हैं। भारत के अलावा विदेशों में भी सागर रत्ना के आउटलेट्स चलते हैं। कर्नाटक के उड्डपी में जन्मे जयराम बनान अपने पिता से काफी डरते थे। जयराम 13 साल के थे तब वो अपनी कक्षा में फेल हो गए। उन्हें पिता का इतना डर था कि उन्हें लगा कि घर गया तो पिताजी से डांट पड़ेगी, इसलिए उन्होंने पिता की मार से बचने के लिए घर छोड़ दिया। साल 1967 में मुंबई पहुंच गए ।

​18 रुपये के वेतन पर सालों तक किया काम​

मुंबई पहुंचने के बाद जयरामको एक रेस्टोरेंट में काम मिल गया। 18 रुपये सैलरी मिलने लगी। उनका काम होटल में जूठे बर्तन और प्लेट धोना था। इसके बाद वो टेबल साफ करने लगे। उनकी मेहनत देखकर रेस्टोरेंट के मालिक ने उन्हें पहले वेटर और फिर उस रेस्टोरेंट का मैनेजर बना दिया गया। उनकी सैलरी 18 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपया महीना कर दी। अपना काम शुरू करने के लिए वो मुंबई से दिल्ली चले आए।

​दिल्ली में मिली कामियाबी​

साल 1974 में वो दिल्ली आए और उन्होंने गाजियाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की कैंटीन चलाना शुरु किया। दोस्तों से उधार लेकर और कुछ अपनी सेविंग के साथ उन्होंने ये काम शुरू किया। पहली निवेश 2000 रुपये का किया। इसके बाद साल 1986 में उन्होंने साउथ दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी अपना पहला रेस्टोरेंट खोला, जिसका नाम सागर रखा। रेस्टोरेंट में पहले दिन की कमाई 408 रुपये रही। इसकी के साथ उनके कारोबारी बनने का सफऱ शुरू हो गया। सागर की शउरुआत के चार साल बाद दिल्ली में एक और रेस्टोरेंट खोला और नए स्टोर में सागर के साथ रतन नाम जोड़ दिया।

​300 करोड़ के मालिक​

कभी 18 रुपये की सैलरी पर काम करने वाले जयराम आज 300 करोड़ रुपये के मालिक है। देश हीं नहीं बल्कि कनाडा, सिंगापुर, बैंकॉक में भी सागर रत्ना के आउटलेट हैं। उन्होंने सागर रत्ना के अलावा उन्होंने 2001 में स्वागत नाम की एक और रेस्टोरेंट चेन शुरू की थी। लोग उन्हें 'नॉर्थ का डोसा किंग भी कहते हैं।
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