बौद्ध धर्म गुरु सुमित रतन भंते का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पूरा क्षेत्र पहले एक बौद्ध मठ था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि इसे बौद्ध भिक्षुओं के हवाले किया जाना चाहिए। सुमित रतन भंते ने दायर याचिका में दावा किया गया है कि हजारों साल पहले कई बौद्ध मठों को तोड़ा गया। उन्हें मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में बदल दिया गया। ज्ञानवापी मस्जिद भी इसी प्रकार का केस है। इसलिए, इसका सर्वे किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केदारनाथ, बद्रीनाथ भी बौद्ध धर्म के स्तूप हैं । हम संबंध में आगे याचिका दायर करेंगे। दरअसल, इस प्रकार का दावा पिछले दिनों सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी किया था। ऐसे में सुमित रतन भंते के बयान को अहम माना जा रहा है।
सुमित रतन भंते श्रमण संस्कृति रक्षा संघ के अध्यक्ष हैं। वे एक बौद्ध धर्मगुरु हैं। श्रमण संस्कृति रक्षा संघ को लेकर उनका दावा है कि यह संगठन देश में बौद्ध समाज और बहुजन समाज की सेवा का कार्य करता है। इन वर्गों पर होने वाले जुल्म के मसले को उठाता है। उनके संगठन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। इसमें बौद्ध धर्म की खूबियों और महात्मा बुद्ध के विचारों को उठाया जाता है। लोगों को साथ में जोड़ने की रणनीति पर भी यह संगठन काम करता है।
सुमित रतन भंते कौन हैं?
सुमित रतन भंते श्रमण संस्कृति रक्षा संघ के अध्यक्ष हैं। वे एक बौद्ध धर्मगुरु हैं। श्रमण संस्कृति रक्षा संघ को लेकर उनका दावा है कि यह संगठन देश में बौद्ध समाज और बहुजन समाज की सेवा का कार्य करता है। इन वर्गों पर होने वाले जुल्म के मसले को उठाता है। उनके संगठन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। इसमें बौद्ध धर्म की खूबियों और महात्मा बुद्ध के विचारों को उठाया जाता है। लोगों को साथ में जोड़ने की रणनीति पर भी यह संगठन काम करता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर है याचिका
ज्ञानवापी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से एएसआई सर्वे पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। इस मांग को लेकर मुस्लिम पक्ष 24 जुलाई को भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उस समय कोर्ट ने तत्काल सर्वे पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद फिर मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। हिंदू पक्ष की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की गई है। वहीं, बौद्ध धर्म गुरु ने विवाद को एक नया एंगल दे दिया है।











