जीतू पटवारी बोले- महंगाई, बेरोजगारी से हर परिवार जूझ रहा है, यही तो मुद्दा है

जीतू पटवारी बोले- महंगाई, बेरोजगारी से हर परिवार जूझ रहा है, यही तो मुद्दा है
भोपाल। भाजपा धार्मिक आधार पर जनता के वोट लेना चाहती है। ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि देश विकसित हो रहा है, पर हकीकत इससे अलग है। महंगाई और बेरोजगारी से हर परिवार जूझ रहा है। किसानों को उपज के दाम नहीं मिल रहे हैं तो महिलाओं से किए वादे अधूरे हैं। यही तो मुद्दे हैं, जिनके आधार पर हम जनता के बीच अपनी बात रखकर समर्थन मांगेंगे।

भाजपा भ्रष्टाचार को लेकर बड़ी-बड़ी बात करती है पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार तो इलेक्टोरल बांड का खेल है जो दुनिया देख चुकी है। चंदा देकर भाजपा की वाशिंग मशीन में सब धुल गया। भाजपा ने राजनीतिक मर्यादा को समाप्त कर दिया है। दूसरे दलों के नेताओं को ईडी, सीबीआइ और आयकर से डराया-धमकाया जा रहा है।

यह सही है कि पार्टी के कई नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ली है लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पहले जिन 65 नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था, उनमें से अधिकांश की राजनीतिक मृत्यु हो गई। आज इनका अता-पता तक नहीं है। ऐसे ही बहुत से मुद्दों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 'नईदुनिया' से विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...

प्रश्न : भाजपा राम मंदिर को लेकर तगड़ी घेराबंदी कर रही है। कांग्रेस के आमंत्रण ठुकराने को मुद्दा बनाकर कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं?

उत्तर : हम तो शुरू से यह बात कहते आ रहे हैं कि भाजपा धार्मिक और लोगों की आस्था से जुड़े विषय को आगे रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया, जिसका सबने स्वागत किया। निर्णय अनुसार जो सरकार में थे, उन्होंने भूमिका निभाई पर यह भी नहीं भूला जाना चाहिए कि मंदिर का ताला राजीव गांधी ने खुलवाया था। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में तो मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान भी नहीं गए। हम ओरछा गए थे, जहां प्रभु श्रीराम दिन में रहते हैं और रात में अयोध्या में।

प्रश्न : प्रदेश में कांग्रेस बिखराव की ओर है। कई बड़े नेता साथ छोड़ चुके हैं?

उत्तर : जब भी टीम बिखरती है तो दुख होता है। ऐसे नेता, जिन्हें पार्टी ने सब-कुछ दिया, उनका छोड़कर जाना बताता है कि दाल में कुछ काला है। ऐसा नहीं है कि मैंने किसी से बात नहीं की। सबसे अच्छे संबंध हैं और चर्चा भी हुई पर सबकी अलग-अलग परिस्थितियां हैं। मैं किसी के बारे में कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करता हूं पर जो गए, उनको शुभकामनाएं दी हैं कि उनके साथ वैसा न हो, जैसा पूर्व में जाने वालों के साथ हुआ।

प्रश्न : कई बड़े नेता चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे। दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक तौर पर मना किया था?

उत्तर : यह बात सही है। इसके पीछे रणनीति यह थी कि युवाओं को आगे किया जाए। दिग्विजय सिंह या फिर अरुण यादव हों, सब तैयार थे। हम स्थानीय और नए चेहरों को मौका देना चाहते थे। 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवाओं को दिया है। एससी-एसटी और ओबीसी को प्रतिनिधित्व दिया है। दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया जैसे बड़े नेता चुनाव लड़ रहे हैं। सामाजिक समीकरण और सहमति के आधार पर प्रत्याशी तय किए गए हैं। गठबंधन का धर्म निभाते हुए खजुराहो सीट सपा को दी है। वहां से मजबूत नाम देने का अनुरोध किया था, जिसे मानते हुए प्रत्याशी बदला गया है।

प्रश्न : विधानसभा चुनाव में करारी हार की वजह क्या मानते हैं?

उत्तर : कुछ हमारी रणनीतिक कमजोरी रही होगी। मोदी की गारंटी और लाड़ली बहना के नाम पर दस प्रतिशत अधिक वोट भाजपा को मिले। किसानों को 3000 रुपये क्विंटल धान और 2600 रुपये गेहूं के देने की बात सबसे पहले हमने रखी। शहरी क्षेत्रों में भाजपा ने ध्रुवीकरण किया, जिसका उसे लाभ मिला।

प्रश्न : लोकसभा चुनाव में क्या मुद्दे रहेंगे। कैसे जनता तक पहुंचेंगे?

उत्तर : भाजपा ने जनता से हर मुद्दे पर वादाखिलाफी की है। महंगाई, बेरोजगारी से हर परिवार जूझ रहा है। मोदी सरकार ने कालेधन को समाप्त करने, दो करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार देने, महंगाई को नियंत्रित करने, किसानों की आय दोगुनी करने जैसे कई वादे किए थे पर एक भी पूरा नहीं हुआ। हमने नारी न्याय, किसान, युवा, महिला और सहभागिता की बात की है और कुछ गारंटियां दी हैं, जिन्हें सरकार में आने पर पूरा करेंगे।

प्रश्न : भाजपा ने इस बार 400 पार और मध्य प्रदेश में सभी 29 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है?

उत्तर : भाजपा को देश में गठबंधन के सहयोगियों समेत 400 और मध्य प्रदेश में 29 में 29 सीटें क्यों चाहिए। दरअसल, यह पार्टी लोकतंत्र को समाप्त करना चाहती है। भाजपा और उसके नेताओं में अहंकार आ गया है और देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करती है। हम प्रदेश में सात सीटें जीतने की स्थिति में हैं। नौ सीटों पर बराबरी की लड़ाई है। बाकी सीटों पर भी हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे

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