हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच आरबीआई प्रमुख नीतिगत दर रेपो को एक बार फिर यथावत रख सकता है। देश के 10 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के स्थिर होने और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सेंट्रल बैंक सावधानी भरा रुख अपनाएगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
अनुमान है कि केंद्रीय बैंक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और असमान मॉनसून से महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी नीतिगत स्थिति को 'तटस्थ' बनाए रखेगा। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक 'देखो और प्रतीक्षा करो' की मुद्रा में रहेगा क्योंकि वह महंगाई के उभरते परिदृश्य का आकलन कर रहा है।इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘फिलहाल, महंगाई नरम बनी हुई है और ऐसे में यथास्थिति ही सबसे अच्छा नीतिगत विकल्प है।'' केंद्रीय बैंक ने वृद्धि दर को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल से रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। अगस्त में ठहराव की उम्मीदों के बावजूद इस वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान आगे नीतिगत दर में बढ़ोतरी हो सकती है।











