जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू राजस्व और आयात से मिलने वाले टैक्स में मजबूत वृद्धि के कारण हुई है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद देश में घरेलू खपत और कारोबारी गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं।
घरेलू जीएसटी से तगड़ी कमाई
- घरेलू गतिविधियों और आयात से मिले टैक्स ने कुल जीएसटी कलेक्शन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।
- जुलाई में घरेलू जीएसटी रेवेन्यू 10.1 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो जुलाई 2025 में 1.31 लाख करोड़ रुपये था।
- आयात से मिलने वाला जीएसटी रेवेन्यू 28.8 प्रतिशत बढ़कर 66,511 करोड़ रुपये हो गया।
रिफंड में 13% से ज्यादा की बढ़ोतरी
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल जीएसटी रिफंड भी बढ़ा है। कुल रिफंड सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये रहा। वहीं, ICEGATE के जरिए प्रोसेस किए गए निर्यात से जुड़े GST रिफंड में 22.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 12,288 करोड़ रुपये रहा।रिफंड को घटाने के बाद जुलाई में शुद्ध जीएसटी रेवेन्यू 1.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 15.8 प्रतिशत अधिक है। इसमें घरेलू शुद्ध जीएसटी रेवेन्यू 10.5 प्रतिशत बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये और कस्टम्स से मिलने वाला शुद्ध जीएसटी रेवेन्यू 30.3 प्रतिशत बढ़कर 54,223 करोड़ रुपये हो गया।
अप्रैल-जुलाई में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान भी जीएसटी कलेक्शन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर 8.43 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.66 लाख करोड़ रुपये था। अप्रैल-जुलाई के दौरान शुद्ध GST कलेक्शन 9.2 प्रतिशत बढ़कर 7.21 लाख करोड़ रुपये रहा।हरियाणा सबसे आगे
- जुलाई के जीएसटी कलेक्शन की सालाना वृद्धि के मामले में हरियाणा 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ सबसे आगे रहा।
- इसके बाद गुजरात और तेलंगाना में जीएसटी कलेक्शन 19-19 प्रतिशत बढ़ा।
- पंजाब और केरल में 16 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 15 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 13 प्रतिशत, कर्नाटक में 12 प्रतिशत और दिल्ली में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- महाराष्ट्र देश में जीएसटी रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है।











