दरअसल ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की 91 प्रतिशत बड़ी संस्थाओं ने भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव किया है। रिपोर्ट बताती है कि अब महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और खुफिया नेटवर्क पर साइबर हमले वैश्विक शक्ति संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बांग्लादेश इसके केन्द्र में है क्योंकि चीन और अमेरिका जैसे देशों के लिए बांग्लादेश एक अहम मोहरा है क्योकि ये हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत-चीन और US के 'डिजिटल चक्रव्यूह' में बुरी तरह फंसा बांग्लादेश? महाशक्तियों के सीक्रेट वॉर ने बढ़ाई धड़कन
ढाका: बांग्लादेश अमेरिका और चीन के बीच का प्यादा बनकर रह गया है। ये दोनों देश बांग्लादेश को अपनी जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर रहा है। बांग्लादेश जैसे छोटे देशों के लिए दिक्कत ये होती है कि ये भारत को लेकर अपनी संप्रभूता की बात करते हैं लेकिन चीन और अमेरिका के आगे ये घुटने पर बैठे नजर आते हैं। बांग्लादेश भी चीन और अमेरिका के बीच ऐसे ही दोनों झूलों में खेल रहा है। लेकिन असल सवाल ये है कि क्या वो महाशक्तियों के बीच चल रहे साइबर संघर्ष से खुद को सुरक्षित रख पाएगा?
दरअसल ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की 91 प्रतिशत बड़ी संस्थाओं ने भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव किया है। रिपोर्ट बताती है कि अब महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और खुफिया नेटवर्क पर साइबर हमले वैश्विक शक्ति संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बांग्लादेश इसके केन्द्र में है क्योंकि चीन और अमेरिका जैसे देशों के लिए बांग्लादेश एक अहम मोहरा है क्योकि ये हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है।
दरअसल ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की 91 प्रतिशत बड़ी संस्थाओं ने भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव किया है। रिपोर्ट बताती है कि अब महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और खुफिया नेटवर्क पर साइबर हमले वैश्विक शक्ति संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बांग्लादेश इसके केन्द्र में है क्योंकि चीन और अमेरिका जैसे देशों के लिए बांग्लादेश एक अहम मोहरा है क्योकि ये हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है।











