पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में सामने आना भारत के लिए चिंता की बात है। खासतौर पर जब ईरान पर हमले से ठीक पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया था। ऐसे में यह लग सकता है कि भारत ने भले ही एक पक्ष का चुना लेकिन उस पक्ष ने भारत को नहीं चुना है।
अमेरिका-ईरान की जंग में मध्यस्थ बनना क्या पाकिस्तान की जीत है, भारत के लिए क्या हैं मायने? एक्सपर्ट से समझें
इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान में टकराव रोकने के लिए पाकिस्तान एक मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट बताती हैं कि इस सप्ताह के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आमने-सामने की बैठक हो सकती है। एक्सियोस के रिपोर्टर बराक रेविड ने एक्स पर पोस्ट में एक इजरायली अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रततिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकती है। हालांकि, यह पहले से ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि पाकिस्तान मध्यस्थता में शामिल हो सकता है लेकिन अब साफ हो गया है। ऐसे में भारत पर इसका असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में सामने आना भारत के लिए चिंता की बात है। खासतौर पर जब ईरान पर हमले से ठीक पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया था। ऐसे में यह लग सकता है कि भारत ने भले ही एक पक्ष का चुना लेकिन उस पक्ष ने भारत को नहीं चुना है।
पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में सामने आना भारत के लिए चिंता की बात है। खासतौर पर जब ईरान पर हमले से ठीक पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया था। ऐसे में यह लग सकता है कि भारत ने भले ही एक पक्ष का चुना लेकिन उस पक्ष ने भारत को नहीं चुना है।











