साल 2012 के बाद पहली बार
सऊदी अरब में हो रहे शिखर सम्मेलन का आयोजन इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी की तरफ से किया जा रहा है। इस संगठन का मुख्यालय सऊदी के शहर जेद्दा में है और इसमें 57 मुस्लिम देश शामिल हैं। इस सम्मेलन से पहले गाजा में जारी युद्ध पर अरब लीग के नेताओं की रियाद में एक इमरजेंसी मीटिंग होनी है। शिखर सम्मेलन की योजना से परिचित सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। रायसी से पहले साल 2012 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति अहमदी नेज्जाद ने सऊदी अरब का दौरा किया था।
सऊदी अरब में हो रहे शिखर सम्मेलन का आयोजन इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी की तरफ से किया जा रहा है। इस संगठन का मुख्यालय सऊदी के शहर जेद्दा में है और इसमें 57 मुस्लिम देश शामिल हैं। इस सम्मेलन से पहले गाजा में जारी युद्ध पर अरब लीग के नेताओं की रियाद में एक इमरजेंसी मीटिंग होनी है। शिखर सम्मेलन की योजना से परिचित सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। रायसी से पहले साल 2012 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति अहमदी नेज्जाद ने सऊदी अरब का दौरा किया था।
रायसी और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच 12 अक्टूबर को पहली फोन कॉल हुई थी। इसमें दोनों नेताओं ने फिलिस्तीन के लिए समर्थन जताया था। ईरान की सरकार न्यूज एजेंसी इरना की तरफ से कहा गया था कि दोनों नेताओं ने फिलिस्तीन के खिलाफ युद्ध अपराधों को खत्म करने की जरूरत पर बल दिया था। कोई भी देश इजरायल को मान्यता नहीं देता है। हालांकि युद्ध से पहले सऊदी अरब अमेरिका की मध्यस्थता के साथ इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने की संभावना पर चर्चा कर रहा था। ईरान पर लंबे समय से हमास को वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान करने का आरोप लगता रहा है।
युद्ध को लेकर परेशान सऊदी
ओआईसी की तरफ से बार-बार गाजा में नागरिकों पर हो रहे हमलों का विरोध किया गया है। सऊदी अरब के अधिकारी युद्ध के संभावित विस्तार को लेकर बहुत चिंतित हैं। उनका मानना है कि यह युद्ध मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 सुधार एजेंडे को पटरी से उतार सकता है। सात अक्टूबर को हमास ने अचानक इजरायल पर हमला बोल दिया था। इसके बाद इजरायल ने संगठन को खत्म करने की कसम खाई थी। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हमास के हमले में 1400 से ज्यादा इजरायली नागरिक मारे गए थे। जबकि 240 लोगों को बंधक बना लिया गया था। जबकि गाजा में अब तक 10000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है जिसमें 4000 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं।











