ईरान, अफ्रीका या उज्बेकिस्तान.... पाकिस्तान से कौन खरीद रहा JF-17 लड़ाकू विमान, दुबई एयरशो में चीन को मिला नया ग्राहक!

ईरान, अफ्रीका या उज्बेकिस्तान.... पाकिस्तान से कौन खरीद रहा JF-17 लड़ाकू विमान, दुबई एयरशो में चीन को मिला नया ग्राहक!
दुबई: दुबई में चल रहे एयरशो में पाकिस्तान में बनने वाले चीनी लड़ाकू विमान JF-17 Block III को एक नया ग्राहक मिलने की रिपोर्ट है। रिपोर्ट है कि पाकिस्तान ने किसी एक देश के साथ एमओयू साइन किया है, लेकिन उस देश के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। जिन तीन देशों के नाम की चर्चा हो रही है, उनमें ईरान, कोई अफ्रीकी देश या उज्बेकिस्तान हैं। हालांकि इसका खुलासा अभी तक पाकिस्तान की तरफ से नहीं किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया है कि कुछ देशों के डेलीगेशन ने एयरक्राफ्ट की कैपेबिलिटी और कॉम्बैट रिकॉर्ड में दिलचस्पी दिखाई है।

आपको बता दें कि JF-17 फाइटर जेट चीन और पाकिस्तान, दोनों देशों में अलग-अलग प्रोडक्शन लाइन पर असेंबल किए जाते है। पाकिस्तान में बनने वाले एयरक्राफ्ट पाकिस्तानी टेक सेक्टर और इंडस्ट्रियल बेस की लिमिटेशन के कारण बहुत ज्यादा चीनी सप्लाई चेन पर निर्भर करते हैं। पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर इसे डेवलप किया है। लेकिन इसमें सिर्फ नाम के लिए पाकिस्तान की हिस्सेदारी है। तमाम क्रिटिकल कंपोनेंट्स, जैसे रडार और मिसाइलें वगैरह चीन में ही बनते हैं। जबकि इसका इंजन चीन, रूस से खरीदता है और फिर पाकिस्तान को बेचता है। चीन इस फाइटर जेट का इस्तेमाल नहीं करता है।
पाकिस्तानी JF-17 लड़ाकू विमान कौन खरीद रहा?
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने अपने लड़ाकू विमानों को लेकर काफी प्रोपेगेंडा फैलाया है। राफेल को बदनाम करने की कोशिश की है और इंटरनेशन मार्केट में J-10C लड़ाकू विमानों को तेजी से बेचने की कोशिश की है। मिलिट्री वॉच मैग्जीन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन भले ही विमान को लेकर कई तरह के दावे कर रहा है, लेकिन भारत के रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने कुछ जेएफ-17 को मार गिराया था। लेकिन चूंकी ये विमान काफी सस्तें हैं और खरीदने वाले देशों के पास चीन के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं है, इसलिए वो पाकिस्तान के इस चीनी एयरक्राफ्ट पर भरोसा दिखा रहे हैं।JF-17 Block III, इस सीरिज का सबसे लेटेस्ट वैरिएंट है, जिसके बाद पाकिस्तान दावा करता है कि इसमें एडवांस कंपोजिट सामग्री, AESA रडार, नई पीढ़ी के कॉकपिट डिस्प्ले, डेटा लिंक और आधुनिक शस्त्र प्रणालियां शामिल हैं। पाकिस्तान ने MoU किस देश के साथ किया है, फिलहाल उसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है और इसके पीछे जियो-पॉलिटिकल वजहें हो सकती हैं। अजरबैजान और म्यांमार, पाकिस्तानी जेएफ-17 का इस्तेमाल करते हैं। जिनमें म्यांमार तकनीकी दिक्कतों, बार बार एयरक्राफ्ट में आने वाली खराबी की वजह से इसका बहुत कम इस्तेमाल करता है। म्यांमार की सेना कई बार गंभीर शिकायतें दर्ज कर चुकी है।
क्या ईरान खरीदने वाला है JF-17?
कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स संभावना जता रहे हैं कि शायद ईरान वो देश हो सकता है, जो पाकिस्तानी विमान में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा हो, क्योंकि जियो-पॉलिटिकल वजहों से ज्यादातर देशों से वो एयरक्राफ्ट नहीं खरीद सकता है। इसके अलावा अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों जैसे अल्जीरिया, सूडान, अंगोला, इथियोपिया और इरिट्रिया को संभावित ग्राहक माना जा रहा है, जिनके चीन के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं। उज्बेकिस्तान भी अपने पुरानी सोवियत MiG-29 फ्लीट को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया में इस विमान पर विचार कर रहा है।
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