सुंदर था यशस्वी का 'बदसूरत गेम प्लान'
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल अक्सर बाउंड्री की झड़ी के साथ पारी की शुरुआत करते हैं। मगर डोमिनिका में ऐसा नहीं था। भले ही केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और जेसन होल्डर बिलकुल आक्रामक नहीं थे, लेकिन स्पिनर रहकीम कार्नवाल और जोमेल वारिकन ने दूसरे दिन के पहले सेशन में भारतीय ओपनर्स से कड़े सवाल किए। मगर बाएं हाथ के इस युवा बल्लेबाज के खिलाफ एंगल के साथ गेंदबाजी की। कैरेबियाई पेसर्स एक खास प्लानिंग के साथ बॉल डालते दिखे। ऐसे में जायसवाल ने अपने खेल को बदला और बाहर जाती गेंदों को छोड़ने लगे। धीरे-धीरे अधिक आश्वस्त हो गए और अपर-कट के बाद हवाई शॉट लगाने लगे। यशस्वी अपनी विस्फोटक बैटिंग स्टाइल को छोड़कर टुक-टुक खेलने लगे। ऐसा लगा कि मानो उन्होंने फैसला कर लिया था कि पवेलियन में बैठकर सुंदर लगने की बजाय वह मैदान के बीच में बदसूरत दिखना पसंद करेंगे।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल अक्सर बाउंड्री की झड़ी के साथ पारी की शुरुआत करते हैं। मगर डोमिनिका में ऐसा नहीं था। भले ही केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और जेसन होल्डर बिलकुल आक्रामक नहीं थे, लेकिन स्पिनर रहकीम कार्नवाल और जोमेल वारिकन ने दूसरे दिन के पहले सेशन में भारतीय ओपनर्स से कड़े सवाल किए। मगर बाएं हाथ के इस युवा बल्लेबाज के खिलाफ एंगल के साथ गेंदबाजी की। कैरेबियाई पेसर्स एक खास प्लानिंग के साथ बॉल डालते दिखे। ऐसे में जायसवाल ने अपने खेल को बदला और बाहर जाती गेंदों को छोड़ने लगे। धीरे-धीरे अधिक आश्वस्त हो गए और अपर-कट के बाद हवाई शॉट लगाने लगे। यशस्वी अपनी विस्फोटक बैटिंग स्टाइल को छोड़कर टुक-टुक खेलने लगे। ऐसा लगा कि मानो उन्होंने फैसला कर लिया था कि पवेलियन में बैठकर सुंदर लगने की बजाय वह मैदान के बीच में बदसूरत दिखना पसंद करेंगे।
लालच बुरी बला
दूसरे दिन के पहले सत्र में यशस्वी जायसवाल की सबसे ज्यादा परीक्षा हुई। जेसन होल्डर ने उन्हें लगातार ऑफ साइड पर फुल गेंदें खिलाई, ड्राइव करने के लिए आमंत्रित किया। मगर जायसवाल ने कोई छेड़खानी नहीं की। 215 गेंदों पर आए शतक से पता चलता है कि उन्होंने क्रीज पर टिके रहने के लिए काफी मेहनत की थी। स्पिनरों ने भी जयसवाल की परीक्षा ली, विशेषकर कार्नवाल की, जिन्हें कुछ उछाल मिला। लेकिन रिवर्स स्वीप सहित कुछ हिट के अलावा, वह गेंद का बचाव करने और छोड़ने से संतुष्ट थे। लंच के बाद जब नजर जमी तो उन्होंने कदमों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। गैप में मारकर रन चुराए। 21 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी ने बताया कि इनिंग कैसी बिल्ड की जाती है और कैसे गति दी जाती है।
दूसरे दिन के पहले सत्र में यशस्वी जायसवाल की सबसे ज्यादा परीक्षा हुई। जेसन होल्डर ने उन्हें लगातार ऑफ साइड पर फुल गेंदें खिलाई, ड्राइव करने के लिए आमंत्रित किया। मगर जायसवाल ने कोई छेड़खानी नहीं की। 215 गेंदों पर आए शतक से पता चलता है कि उन्होंने क्रीज पर टिके रहने के लिए काफी मेहनत की थी। स्पिनरों ने भी जयसवाल की परीक्षा ली, विशेषकर कार्नवाल की, जिन्हें कुछ उछाल मिला। लेकिन रिवर्स स्वीप सहित कुछ हिट के अलावा, वह गेंद का बचाव करने और छोड़ने से संतुष्ट थे। लंच के बाद जब नजर जमी तो उन्होंने कदमों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। गैप में मारकर रन चुराए। 21 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी ने बताया कि इनिंग कैसी बिल्ड की जाती है और कैसे गति दी जाती है।
घरेलू क्रिकेट का 'युवराज'
जायसवाल की रनों की भूख जगजाहिर है। वह जूनियर लेवल से ही रनों का अंबार लगा रहे हैं। क्रीज पर समय गुजारना, अच्छी गेंदों का सम्मान करना। बुरी गेंदों को बाउंड्री के पार पहुंचाना, इन सारी कला में पारंगत है। स्कूल क्रिकेट से लेकर क्लब और फिर सैयद मुश्ताक, दलीप और रणजी ट्रॉफी में भारी स्कोर किया। प्रथम श्रेणी औसत 80 से ऊपर, 50 ओवर के क्रिकेट में दोहरा शतक, टी-20 में शतक और 2023 में एक सफल आईपीएल ने 21 वर्षीय खिलाड़ी को तेजी से टेस्ट प्लेइंग इलेवन में जगह दिला दी। और यही असली परीक्षा थी। जायसवाल ने पहली परीक्षा पास कर ली है, हर कोई जानता था कि वह पारी की शुरुआत से ही तेज रन बना सकते हैं। मगर सवाल तो यह था कि क्या उनमें उच्चतम स्तर पर धीमे गियर पर स्विच करने की क्षमता है।
जायसवाल की रनों की भूख जगजाहिर है। वह जूनियर लेवल से ही रनों का अंबार लगा रहे हैं। क्रीज पर समय गुजारना, अच्छी गेंदों का सम्मान करना। बुरी गेंदों को बाउंड्री के पार पहुंचाना, इन सारी कला में पारंगत है। स्कूल क्रिकेट से लेकर क्लब और फिर सैयद मुश्ताक, दलीप और रणजी ट्रॉफी में भारी स्कोर किया। प्रथम श्रेणी औसत 80 से ऊपर, 50 ओवर के क्रिकेट में दोहरा शतक, टी-20 में शतक और 2023 में एक सफल आईपीएल ने 21 वर्षीय खिलाड़ी को तेजी से टेस्ट प्लेइंग इलेवन में जगह दिला दी। और यही असली परीक्षा थी। जायसवाल ने पहली परीक्षा पास कर ली है, हर कोई जानता था कि वह पारी की शुरुआत से ही तेज रन बना सकते हैं। मगर सवाल तो यह था कि क्या उनमें उच्चतम स्तर पर धीमे गियर पर स्विच करने की क्षमता है।











