वहीं, इसने 10 उभरते देशों के ग्रोथ अनुमान को पहले के 4.3% से घटाकर 4% कर दिया है। इसके लिए फिच ने चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट को जिम्मेदार ठहराया है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘यह कमी मुख्य रूप से चीन की सप्लाई-साइड ग्रोथ पोटेंशियल के अनुमान में 0.7% अंक की बड़ी कमी के कारण आई है।' चीन के मिड टर्म ग्रोथ अनुमान को 5.3 फीसदी से घटाकर 4.6 फीसदी कर दिया गया है।
क्या कहा रिपोर्ट में
‘हमने भारत और मैक्सिको को बड़े पैमाने पर अपग्रेड किया है। भारत के ग्रोथ अनुमान को 5.5% से बढाकर 6.2% जबकि मेक्सिको के ग्रोथ अनुमान को 1.4% से बढाकर 2% किया गया है। फिच ने कहा है कि 2023-24 के लिए भारत की विकास दर 6.3 % रहने की उम्मीद है।ये चिंता भी है
फिच ने मध्यम अवधि 2023 से 2027 को माना है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, भागीदारी दर में नकारात्मक वृद्धि के अनुमान को देखते हुए भारत की अनुमानित श्रम आपूर्ति वृद्धि 2019 की तुलना में कम है। हालांकि, भागीदारी दर अपनी कोविड-19 महामारी की नरमी से उबर गई है, लेकिन यह 2000 के दशक की शुरुआत में दर्ज स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। महिलाओं के बीच रोजगार दर कम है।











